एग्रीटेक से हेल्थकेयर तक, यूपी की 9,600 महिला उद्यमी बदल रही हैं प्रदेश की तकदीर

Sandesh Wahak Digital Desk: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इस खास मौके पर उत्तर प्रदेश से एक ऐसी खबर आई है जो हर महिला के लिए गर्व की बात है। कभी चूल्हे-चौके तक सीमित समझी जाने वाली महिलाएं आज प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही हैं। योगी सरकार की नीतियों के दम पर यूपी अब ‘महिला उद्यमियों’ का नया गढ़ बनता जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में अब बेटियां सिर्फ नौकरी नहीं मांग रहीं, बल्कि नौकरियां दे रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आए आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में 9,600 से अधिक महिला संचालित स्टार्टअप्स सफलतापूर्वक चल रहे हैं। तकनीक से लेकर खेती (एग्रीटेक) और स्वास्थ्य (हेल्थकेयर) तक, हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी बुद्धिमानी और नवाचार (Innovation) का लोहा मनवा रही हैं।

नीतियों ने दी सपनों को उड़ान

इस सफलता के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा लागू की गई ‘स्टार्टअप नीति’ का बड़ा हाथ है। सरकार ने न केवल महिलाओं को प्रोत्साहित किया, बल्कि उन्हें ट्रेनिंग, मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन जैसी सुविधाएं भी दीं। आज छोटे शहरों और कस्बों की महिलाएं भी अपने बिजनेस आइडिया को हकीकत में बदल रही हैं।

करोड़ों का फंड और ‘निधि’ योजना का सहारा

महिला उद्यमियों को पैसे की कमी न खले, इसके लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। 1000 करोड़ रुपये के इस फंड में से अब तक करीब 325 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं, जिसका लाभ 900 से ज्यादा महिला स्टार्टअप्स को मिला है। भारत सरकार की निधि (NIDHI) योजना के तहत यूपी के 25 महिला स्टार्टअप्स को विशेष वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे उन्हें अपने व्यापार को बड़े स्तर पर ले जाने में मदद मिली है।

छोटे शहरों की ‘बड़ी’ सोच

अब स्टार्टअप कल्चर सिर्फ नोएडा या लखनऊ तक सीमित नहीं है। स्टार्टअप विशेषज्ञ अजय चतुर्वेदी बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के गांवों और छोटे कस्बों की महिलाएं एग्रीटेक प्लेटफॉर्म और नए सर्विस मॉडल विकसित कर रही हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

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