फर्जी दस्तावेजों से होम लोन कराने वाले गिरोह का खुलासा, STF ने दो शातिरों को लखनऊ से दबोचा

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों को हाउसिंग लोन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक संगठित गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

गिरफ्तारी और अभियुक्तों का विवरण

एसटीएफ की टीम ने यह कार्रवाई 4 अक्टूबर 2025 को एसटीएफ मुख्यालय, लखनऊ से की। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान इस प्रकार है:

  • विनीत कुमार (निवासी बीबी खेड़ा, आवास विकास कॉलोनी, पारा, लखनऊ)।
  • दीपक रावत (निवासी राजजीपुरम, तालकटोरा, लखनऊ)।

गिरोह की कार्यप्रणाली और धोखाधड़ी

गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि वे अपने साथियों अभिषेक सोनी और अमित रस्तोगी के साथ मिलकर होम लोन की जरूरत वाले लोगों को निशाना बनाते थे। वे उन्हें बैंक से लोन दिलाने का विश्वास दिलाते थे और फिर आवश्यक दस्तावेज लेते थे। अपने घर पर कंप्यूटर का उपयोग करके लोन से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। इन कूटरचित फाइलों पर ग्राहकों के हस्ताक्षर कराते थे। लोन कराने के कमीशन, रजिस्ट्री शुल्क, और स्टाम्प शुल्क के नाम पर बड़ी रकम वसूलते थे।

बदमाश धोखाधड़ी के बाद पकड़े जाने से बचने के लिए वे समय-समय पर मोबाइल नंबर और रहने का स्थान बदल लेते थे। एसटीएफ की जांच से पता चला है कि इस गिरोह ने फर्जी लोन के माध्यम से अब तक करोड़ों रुपये कमाए हैं।

धोखाधड़ी का एक मामला

इस गिरोह का पर्दाफाश चांद बाबू नामक एक व्यक्ति की शिकायत के बाद हुआ, जिसे मकान खरीदने के लिए लोन की आवश्यकता थी। चांद बाबू ने विनीत और दीपक से संपर्क किया, जिन्होंने आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से लोन कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने फाइल तैयार कराने के नाम पर 21,000 रुपये नकद और ऑनलाइन लिए। इसके बाद, 50 लाख 90 हजार रुपये के लोन अप्रूवल का फर्जी दस्तावेज दिखाकर 4 प्रतिशत कमीशन (लगभग 4 लाख रुपये) और रजिस्ट्री के नाम पर 1 लाख 50 हजार रुपये लिए। अभियुक्तों ने बाद में व्हाट्सएप पर यस बैंक की 10 लाख और 40 लाख 90 हजार रुपये की फर्जी डीडी की फोटो भेजी। बैंक में जाँच करने पर दोनों डीडी फर्जी निकलीं, जिसके बाद धोखाधड़ी का पता चला।

बरामदगी और आगे की कार्रवाई

  • 5 मोबाइल फोन, 7 एटीएम कार्ड, 4 पैन कार्ड।
  • 1 डेस्कटॉप कंप्यूटर (फर्जी दस्तावेज बनाने में प्रयुक्त)।
  • 3 कूटरचित आधार कार्ड और 1 ड्राइविंग लाइसेंस।
  • 103 वर्क लोन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों की छायाप्रति।
  • विभिन्न लोगों द्वारा हस्ताक्षरित 28 चेक।

गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ थाना साइबर क्राइम, लखनऊ में भारतीय न्याय संहिता (BNS-2023) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। एसटीएफ अब गिरोह के अन्य सदस्यों अभिषेक सोनी और अमित रस्तोगी की गिरफ्तारी और बैंक खातों की विस्तृत जांच में जुटी है।

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