उपराष्ट्रपति पद की रेस में गुलाम नबी आज़ाद! NDA बैठक के बाद हो सकती है घोषणा

Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली की सियासी हलचलों के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता रह चुके गुलाम नबी आज़ाद का नाम अब उपराष्ट्रपति पद के लिए लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा सूत्रों की मानें तो एनडीए उन्हें अपना उम्मीदवार बना सकती है और औपचारिक ऐलान सिर्फ बैठक के बाद होना बाकी है। कांग्रेस के ‘पोस्टर बॉय’ रहे आज़ाद अब भाजपा की नजर में अनुभव और सौम्यता का प्रतीक बन चुके हैं।

गुलाम नबी आज़ाद की लगभग 50 वर्षों की कांग्रेस यात्रा तब थमी, जब 2021 में उन्हें राज्यसभा टिकट से वंचित किए जाने के संकेत मिले। इसके बाद उन्होंने तीखा इस्तीफा पत्र लिखकर राहुल गांधी और पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 2022 में उन्होंने अपनी पार्टी ‘डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी’ बनाई, लेकिन चुनावी ज़मीन पर इसका खास असर नहीं पड़ा।

मोदी सरकार पहले ही पद्मविभूषण से कर चुकी है सम्मानित।

मोदी सरकार पहले ही उन्हें 2022 में पद्मविभूषण सम्मान देकर भावी संकेत दे चुकी थी। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राज्यसभा विदाई भाषण में उनकी आंखों में आए आंसू और तारीफें अब राजनीतिक नतीजों में तब्दील होती दिख रही हैं।

भाजपा की रणनीति साफ है—विपक्ष के अनुभवी नेताओं को संवैधानिक पदों के ज़रिए अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना। आज़ाद भी इसी कड़ी में नया नाम हो सकते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू से गुपचुप मुलाकातें इस दिशा में प्रयास का हिस्सा हैं।

INDIA गठबंधन के लिए यह झटका साबित हो सकता।

कांग्रेस और INDIA गठबंधन के लिए यह झटका साबित हो सकता है। खासकर तब, जब आज़ाद ने पार्टी छोड़ते समय राहुल गांधी की आलोचना कर कांग्रेस के भीतर भी खलबली मचा दी थी। अब अगर भाजपा उन्हें उपराष्ट्रपति बना देती है, तो यह कांग्रेस की नैतिक पराजय और बुज़ुर्ग नेताओं की उपेक्षा का उदाहरण बन सकता है। कभी ‘आज़ाद’ नाम वाले नेता अब भाजपा की छत्रछाया में एक बड़े संवैधानिक पद की ओर अग्रसर हैं। विपक्ष भले इसे मुद्दा न माने, पर सियासी गलियारों में यह बदलाव बहुत कुछ कह रहा है।

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