गोंडा: बिजली विभाग में बड़ी कार्रवाई, 10 जेई को नोटिस, 5 इंजीनियरों पर भी गिरी गाज

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बिजली विभाग के कामकाज में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। विभाग की महत्वपूर्ण ‘राहत योजना’ को जनता तक पहुँचाने में कोताही बरतने पर 10 जूनियर इंजीनियरों (JE) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि 5 अन्य इंजीनियरों से भी जवाब-तलब किया गया है।

क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने मंडल स्तर की समीक्षा बैठक में पाया कि सरकार की बिजली राहत योजना की रफ्तार बेहद सुस्त है। मंडल के लगभग 9 लाख उपभोक्ताओं को इस योजना का लाभ दिलाने का लक्ष्य था, लेकिन धरातल पर रोजाना सिर्फ एक-दो पंजीकरण ही हो रहे थे। कई फीडरों और उपकेंद्रों पर तैनात इंजीनियरों ने जागरूकता फैलाने में कोई रुचि नहीं दिखाई, जिससे आम जनता सरकारी लाभ से वंचित रह गई।

इन जूनियर इंजीनियरों (JE) को थमाया गया नोटिस

लापरवाही के आरोपों में जिन जेई के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

अरविन्द सिंह (जेई भभुआ)

शत्रुध्न सिंह (जेई मनकापुर)

आदर्श कुमार (जेई दुबहा)

विकास चंद (जेई कटरा, श्रावस्ती)

मो. तबरेज (जेई जेल रोड)

दीपक तिवारी (जेई रेहरा, बलरामपुर)

बृजेश कुमार (जेई बेहडा, बहराइच)

सुनील कुमार वर्मा (तेजवापुर, बहराइच)

राम अचल (जेई घंटाघर)

राम नरेश (जेई पचपेडवा) (इसके अलावा संदीप यादव और नेम कुमार को भी नोटिस जारी किया गया है।)

फरवरी तक का अल्टीमेटम: ‘काम करो या कार्रवाई झेलो’

मुख्य अभियंता ने साफ कर दिया है कि यह योजना फरवरी तक ही प्रभावी है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि हर उपकेंद्र पर कैंप लगाकर उपभोक्ताओं का पंजीकरण किया जाए। लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से योजना की जानकारी घर-घर पहुंचाई जाए। उपभोक्ताओं की समस्याओं को पेंडिंग रखने के बजाय तुरंत हल किया जाए। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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