Gonda: विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता आनंद सिंह का निधन, 4 बार कांग्रेस से रहे हैं सांसद
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक लंबा समय बिताने वाले पूर्व सांसद और पूर्व कृषि मंत्री आनंद सिंह का रविवार देर रात लखनऊ में निधन हो गया। वह केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता थे। 85 वर्षीय आनंद सिंह को रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही यह खबर गोंडा और आस-पास के इलाकों में पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई।
चार बार सांसद, एक बार मंत्री
4 जनवरी 1939 को जन्मे आनंद सिंह उर्फ ‘अन्नू भैया’ ने राजनीति में एक अलग पहचान बनाई। वह गोंडा लोकसभा सीट से 1971, 1980, 1984 और 1989 में कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए। उनका प्रभाव ऐसा था कि पूर्वांचल की राजनीति में उन्हें ‘यूपी टाइगर’ और ‘मनकापुर के राजा’ के नाम से जाना जाता था।
एक समय ऐसा भी था जब कांग्रेस पार्टी उन्हें सिर्फ चुनाव चिन्ह सौंप देती और वो जिसे टिकट देना चाहते, वह चुनाव जीत जाता। मनकापुर कोट की छाया में पले नेता विधायक, सांसद, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष बनते थे।
कृषि मंत्री के तौर पर भी निभाई जिम्मेदारी
वर्ष 2012 में आनंद सिंह समाजवादी पार्टी से गौरा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए और अखिलेश यादव सरकार में कृषि मंत्री बने। लेकिन 2017 के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी और सार्वजनिक जीवन में कम ही दिखाई देते थे।
राजनीतिक सफर में उतार-चढ़ाव
- 1971, 1980, 1984, 1989: कांग्रेस के टिकट पर गोंडा से लोकसभा पहुंचे
- 1991: राम लहर में बृजभूषण शरण सिंह से पराजय
- 1996: पत्नी केतकी देवी सिंह ने भाजपा के टिकट पर आनंद सिंह (तब एसपी प्रत्याशी) को हराया
- इसके बाद उन्होंने संसदीय चुनावों से संन्यास ले लिया, हालांकि विधानसभा चुनाव लड़े
पारिवारिक और राजनीतिक विरासत
उनके पुत्र कीर्तिवर्धन सिंह वर्तमान में गोंडा से भाजपा सांसद हैं और केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री के पद पर कार्यरत हैं। राजनीतिक तौर पर कीर्तिवर्धन सिंह अब अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। पूर्व मंत्री के करीबी केबी सिंह ने बताया कि आनंद सिंह न सिर्फ चार बार सांसद रहे, बल्कि उन्होंने अपने मजबूत नेतृत्व और प्रभाव से पूर्वांचल की राजनीति में गहरी छाप छोड़ी। उन्हें जनता का नेता और नेताओं का मार्गदर्शक माना जाता था।
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