Gonda News: नवाबगंज थानाध्यक्ष के लिए मायने नहीं रखता अदालत का आदेश!

विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट द्वारा दिए आदेश पर 28 दिन बाद भी नहीं दर्ज किया मुकदमा

Sandesh Wahak Digital Desk/A.R.Usmani: गोण्डा जिले में अपनी बेअंदाज कार्यशैली व वजीरगंज थाने पर तैनाती के दौरान फरियादी को भद्दी-भद्दी गालियां देकर चर्चा में आए उपनिरीक्षक अभय सिंह इन दिनों नवाबगंज में अपनी मनमर्जी का सिक्का चला रहे हैं। आलम यह है कि करीब तीन माह पूर्व दलित महिला व उसके परिजनों को मारने-पीटने तथा जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के मामले में उन्होंने कार्रवाई करने से हाथ खड़े कर दिए। हद तो तब हो गई जब विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट द्वारा दिए गए आदेश के 28 दिन बाद भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की गयी।

सरयूघाट चौकी प्रभारी संजीव सिंह व कांस्टेबल विपिन सिंह भी है आरोपी

नवाबगंज थानाध्यक्ष अभय सिंह का विवादों से गहरा नाता रहा है। वजीरगंज थानाध्यक्ष पद पर तैनाती के दौरान उन पर अपनी बेटी की बरामदगी की फरियाद लेकर गये एक पीड़ित को ही भद्दी-भद्दी गालियां देने का गंभीर आरोप लगा, जिसका आडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। नवाबगंज थाने पर तैनाती के दौरान भी अभय सिंह खूब गुल खिला रहे हैं।

हद तो यह है कि अदालत के आदेश का भी पालन नहीं कर रहे हैं। दरअसल, नवाबगंज थाना क्षेत्र के इस्माइलपुर गांव की रहने वाली दलित पुष्पा देवी पत्नी रामवन्त ने  न्यायालय विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट के यहां वाद दायर किया, जिसमें कहा कि 31 मई को अपराह्न 4 बजे विपक्षी संतोष यादव, अभय सिंह व रमेश यादव सरयू घाट चौकी प्रभारी संजीव कुमार सिंह व कांस्टेबल विपिन कुमार सिंह से साठगांठ कर उसके घर के बगल में बिना किसी पूर्व सूचना के जमीन की पैमाइश कराने लगे।

जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप

इस पर पुष्पा देवी के बेटे ने जब हल्का लेखपाल मनोज चौबे से पूछा कि किसके आदेश पर पैमाइश की जा रही है, इस पर संतोष व रमेश ने मां-बेटे को जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए भद्दी-भद्दी गालियां दी और मारने-पीटने लगे। पुष्पा का पति रामवन्त व रेनू देवी बचाने दौड़े तो उन्हें भी दबंगों द्वारा बुरी तरह मारा-पीटा गया। आरोप है कि इस दौरान सरयूघाट चौकी प्रभारी संजीव कुमार सिंह व कांस्टेबल विपिन कुमार सिंह मौके पर मौजूद रहे लेकिन उन्होंने बीच-बचाव व कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा और तमाशबीन बने रहे।

इतना ही नहीं, चौकी प्रभारी द्वारा आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय पुष्पा देवी के बेटे शेष कुमार व उसके देवर के बेटे हीरालाल को जबरन थाने पर ले जाया गया, जहां एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए जिला कारागार, गोण्डा भेजवा दिया गया, जबकि दूसरे पक्ष के दबंगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इस पर 09 जून को पीड़िता पुष्पा देवी द्वारा पुलिस अधीक्षक को पुनः प्रार्थना पत्र जरिए रजिस्टर्ड डाक भेजा गया। इसके पहले 05 जून को डीजीपी, डीआईजी, डीएम व एसपी को रजिस्ट्री के जरिए शिकायती पत्र भेजा और न्याय की गुहार लगाई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली।

सरयूघाट चौकी प्रभारी व कांस्टेबल भी है आरोपी

दरअसल, इस मामले में इस्माइलपुर गांव के रहने वाले विपक्षियों के साथ ही सरयूघाट चौकी प्रभारी संजीव सिंह व कांस्टेबल विपिन सिंह भी आरोपी हैं। यही वजह है कि थानाध्यक्ष अभय सिंह कोर्ट के आदेश के बाद भी मुकदमा दर्ज करने में हीलाहवाली कर रहे हैं।

विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट द्वारा दिया गया आदेश

विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट, गोण्डा द्वारा आदेश दिया गया कि आवेदिका पुष्पा देवी द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा -173(4) बीएनएसएस स्वीकार किया जाता है। थानाध्यक्ष नवाबगंज, जिला गोण्डा को आदेशित किया जाता है कि वे उक्त प्रकरण के संबंध में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना कराया जाना सुनिश्चित करें। कोर्ट द्वारा 31 जुलाई को दिए गए आदेश को 28 दिन हो गए लेकिन अभी तक आरोपियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत नहीं किया गया। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि नवाबगंज थानाध्यक्ष अभय सिंह के लिए अदालत का आदेश भी कोई मायने नहीं रखता!

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