Gonda News: मरीज की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा, डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप

आए दिन सुर्खियों में रहता है आशादेव मेमोरियल सर्जिकल एंड मैटरनिटी हॉस्पिटल

Sandesh Wahak Digital Desk: गोण्डा शहर में स्थित आशा देव हॉस्पिटल आए दिन सुर्खियों में रहता है। कभी ऑपरेशन व इलाज में लापरवाही को लेकर तो कभी मरीज की मौत को लेकर उंगलियां उठाई जाती रही हैं। इसके बावजूद यहां का बिगड़ा सिस्टम बेपटरी है और जिम्मेदार अधिकारी व जिला प्रशासन भी इसको लेकर कतई गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि धरती के भगवान कहे जाने वाले अधिकांश डॉक्टर अपनी मनमर्जी, तानाशाही और दादागिरी के आरोपों से घिरे हुए हैं। प्रशासनिक सहयोग न मिलने से गरीब मरीजों व तीमारदारों को सब कुछ गंवा देने के बाद भी चुप्पी साधनी पड़ती है।

आए दिन सुर्खियों में रहता है आशादेव मेमोरियल सर्जिकल एंड मैटरनिटी हॉस्पिटल

ताज़ा मामला रविवार का है, जब जिले के कटरा बाजार थाना क्षेत्र के अशोकपुर बंजरिया गांव की गीता मिश्रा की मौत को लेकर परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया। बताया गया कि गीता मिश्रा को बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए आईटीआई-कचहरी रोड स्थित आशा देव मेमोरियल हॉस्पिटल में लाया गया था, जहां आरोप है कि डॉक्टर ने घोर लापरवाही बरतते हुए एक के बजाय दो ऑपरेशन कर दिया।

रविवार को इलाज के दौरान गीता मिश्रा की मौत हो गयी। इस पर परिजनों ने आशा देव मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टर पर इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया और अस्पताल प्रबंधन पर गीता के इलाज व ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाया।

डॉक्टर व अस्पताल प्रबंधन पर लगाए जा चुके हैं गंभीर आरोप

इस संबंध में इंद्रकुमार मिश्र पुत्र भगौती मिश्रा निवासी ग्राम अशोकपुर बंजरिया, थाना कटरा बाजार द्वारा नगर कोतवाली में तहरीर दी गयी, जिसमें कहा गया कि उसने अपनी पत्नी गीता को दिनांक 03.06.2025 को दोपहर करीब 01 बजे आशादेव मेमोरियल सर्जिकल एंड मैटरनिटी हॉस्पिटल, गोण्डा लेकर आया था और डॉ देवेन्द्र मोहन शुक्ल को दिखाया। डॉक्टर की सलाह पर बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए आशादेव हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। उसी रात करीब 10 बजे ऑपरेशन हुआ। इसके बाद मरीज का उपचार शुरू किया गया। लगभग पांच दिन बाद भी सुधार न होने पर डॉक्टर को बताया गया। इस पर मरीज को देखने के बाद डॉक्टर ने दोबारा आपरेशन की सलाह दी।

मृतका गीता मिश्रा की फाइल फोटो

गीता के पति इंद्र कुमार मिश्र से कहा गया कि चार-पांच टांका खोलकर देखा जाएगा कि क्या दिक्कत है। मरीज को फिर आपरेशन थियेटर में ले गए जहां पर फिर से पेट का 27-28 टांका खोला गया और आपरेशन किया गया लेकिन इसके बाद भी मरीज को ठीक नहीं कर पाए। आरोप लगाया कि इसके बाद भी उससे रूपए की मांग की जाती रही।

इंद्र कुमार मिश्रा ने पुलिस को दी गयी तहरीर में आरोप लगाया कि डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही के कारण 15 जून को उसकी पत्नी गीता मिश्रा की मृत्यु सुबह करीब 05 बजे हो गयी। तहरीर मिलते ही पुलिस हरकत में आ गयी, लेकिन हॉस्पिटल पहुंचकर सुलह-समझौते के प्रयास में जुट गयी। आरोप है कि इस मामले में पुलिस ने दबाव बनाकर सुलह-समझौता करा दिया।

सात दिन में किए दो ऑपरेशन, लगाए 27 टांके

परिजनों के अनुसार गीता मिश्रा को बच्चेदानी से संबंधित समस्या थी, जिसके चलते उसे तीन जून को गायत्रीपुरम चौराहे के पास स्थित आशादेव मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि भर्ती के सात दिनों के भीतर महिला का दो बार ऑपरेशन किया गया। दूसरे ऑपरेशन में पेट में 27 टांके लगाए गए थे।

ऑपरेशन के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई लेकिन अस्पताल प्रबंधन उसे लगातार ठीक होने का भरोसा देता रहा। आशादेव हॉस्पिटल के डॉक्टर के विश्वास पर परिजन बैठे रहे और इलाज के नाम पर उन्हें लूटा जाता रहा। शनिवार को देर रात महिला की तबीयत अचानक फिर गंभीर रूप से बिगड़ गयी। रविवार को सुबह करीब 05 बजे उसकी मौत हो गयी।

सर्जन डॉ देवेन्द्र मोहन शुक्ल

परिजनों के आरोप निराधार: डॉ देवेन्द्र मोहन शुक्ल

गीता मिश्रा की मौत को लेकर परिजनों द्वारा हंगामा खड़ा किए जाने व डॉक्टर एवं स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाए जाने पर आशादेव मेमोरियल सर्जिकल एंड मैटरनिटी हॉस्पिटल के सर्जन डॉ देवेन्द्र मोहन शुक्ल का कहना है कि परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गयी।

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