Gonda News: विनय शंकर के बहाने पूर्वांचल में ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की समाजवादी रणनीति!

Sandesh Wahak Digital Desk/A.R.Usmani: वैसे तो यूपी विधानसभा चुनाव अभी बहुत दूर है, लेकिन अभी से ही सूबे की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ब्राह्मणों को लुभाने में जुट गयी है। इसके लिए उसने पूर्वांचल के बाहुबली ब्राह्मण नेता रहे हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी को आगे किया है। बुधवार को लखनऊ से गोरखपुर के लिए जब विनय शंकर का काफिला निकला तो जगह-जगह समाजवादी पार्टी के साथ ही बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोगों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।

15 फीसदी से ज्यादा ब्राह्मण वोट वाले माने जाते हैं 15 जिले

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार ब्राह्मण मतदाता एक मजबूत वोट बैंक के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों में अभी से ही ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की होड़ मच गयी है। इसमें मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी सबसे आगे है। हालांकि, कांग्रेस और सत्तारूढ़ बीजेपी भी ब्राह्मणों को लुभाने की जी-तोड़ कोशिशें कर रही हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाता करीब 12 से 14 प्रतिशत माना जाता है। इसमें करीब 115 सीटें ऐसी हैं, जिनमें ब्राह्मण मतदाताओं का अच्छा-खासा प्रभाव है। करीब 15 फीसदी से ज्यादा ब्राह्मण वोट वाले 15 जिले माने जाते हैं।

इनमें गोण्डा, बलरामपुर, बस्ती, संत कबीर नगर, महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, अमेठी, वाराणसी, चंदौली, कानपुर, इलाहाबाद प्रमुख हैं। यही नहीं, पूर्वी से लेकर मध्य, बुंदेलखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश की करीब 100 सीटों पर ब्राह्मण मतदाता भले ही संख्या में ज्यादा न हों, लेकिन मुखर होने के कारण सियासी माहौल बनाने और बिगाड़ने का माद्दा रखते हैं।

सूबे की सत्ता में गेम चेंजर साबित होते रहे हैं ब्राह्मण वोटर

वैसे वोट शेयर की बात करें तो ब्राह्मण वर्ग की आबादी मुस्लिम और दलितों की आबादी से कहीं कम है, लेकिन रणनीति के लिहाज से मुस्लिम और दलित सत्ता में उतनी दखल नहीं रखते, जितनी ब्राह्मण रखता है। प्रदेश में तकरीबन सभी पार्टियों ने इस वर्ग के नेताओं को अपने करीब ही रखा है। इस रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूपी के 21 मुख्यमंत्रियों में 6 ब्राह्मण रहे। इनमें नारायण दत्त तिवारी 3 बार सीएम रहे। यही नहीं, हर सरकार में मंत्री पदों पर ब्राह्मणों की संख्या आबादी की तुलना में दूसरी जातियों से बेहतर ही रही है।

हालांकि मंडल कमीशन के बाद से यूपी में दलित-ओबीसी राजनीति ने जोर पकड़ा और उसके बाद से अब तक कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं बन पाया, लेकिन मतदाता के तौर पर इस जाति ने 90 के दशक के दौरान शुरुआती झटकों से उबरते हुए पुराना रसूख फिर से हासिल कर लिया है। यही कारण है कि मनुवाद का सीधा विरोध करने और मंडल कमीशन के बाद बदले सियासी माहौल में सत्ता पर काबिज होने वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी अब ब्राह्मण वोट बैंक को आकर्षित करने की रणनीति बना रही हैं।

ब्राह्मण वोटरों को साधने की रणनीति को देंगे धार

सपा ने तो पूर्वांचल के बाहुबली ब्राह्मण नेता रहे स्वर्गीय हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी के बुधवार को लखनऊ से गोरखपुर अपने पैतृक आवास जाने के दौरान जगह-जगह ऐतिहासिक स्वागत के बहाने इस रणनीति का शंखनाद भी कर दिया है। अप्रैल माह में ईडी ने जब विनय शंकर तिवारी को गिरफ्तार किया था, तब पूर्वांचल के ब्राह्मणों में गर्माहट महसूस की गयी थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका तगड़ा रिएक्शन देखने को मिला था। इस गर्माहट को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने शिद्दत से महसूस किया और उन्होंने विनय शंकर तिवारी के बहाने पूर्वांचल में ब्राह्मण वोटरों को साधने की अपनी रणनीति को धार दे दिया।

इसके लिए अखिलेश यादव ने 4 जून को लखनऊ से गोरखपुर जाते समय विनय शंकर तिवारी का जगह-जगह ऐतिहासिक स्वागत करने का फरमान जारी कर दिया, जिसे सपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और ब्राह्मण समाज के लोगों द्वारा अमलीजामा पहनाया गया और उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। भावुकता और उत्साह भरे इस क्षण को विनय शंकर तिवारी भी नहीं गंवाया।

उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की राजसत्ता मधांध हो चुकी है। अधिकारी भी मधांध हैं। ब्राह्मण समाज के खिलाफ पूरे प्रदेश में एक मुहिम चलाई जा रही है। यह केवल विनय शंकर तिवारी या किसी पाण्डेय या शुक्ला के खिलाफ नहीं है। पूरे ब्राह्मण समाज के खिलाफ है। यदि इस मधांध राजसत्ता को सबसे ज्यादा समस्या है, तो केवल ब्राह्मण समाज है। इसलिए ब्राह्मण विरोधी इस सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से उखाड़ फेंकने की जरूरत है।

Also Read: 40 हजार का वादा और 5 हजार एडवांस…, ऐसे रची गई थी हत्या की साजिश, पत्नी और उसका प्रेमी गिरफ्तार

Get real time updates directly on you device, subscribe now.