Gonda Politics: पूर्वांचल की सियासत में नयी इबारत लिख सकती है बृजभूषण-योगेश की मुलाकात!
Sandesh Wahak Digital Desk/A.R.Usmani: ‘वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या, जिस पथ पर बिखरे शूल न हों, नाविक की धैर्य कुशलता क्या, जब धाराएं प्रतिकूल न हों।’ पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह कविता की इन पंक्तियों को अक्सर अपने भाषणों में दोहराया करते हैं। उन्हें करीब से जानने-समझने वाले कहते हैं कि यही उनके जीवन का आधार रहा है। छात्र जीवन से लेकर राजनीतिक करियर में तमाम उतार-चढ़ाव देखने वाले बृजभूषण को वैसे तो आसान राहों का सफर अच्छा नहीं लगता है, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी में जिस तरह से उनके दबदबे और रसूख को दबाने का काम किया गया, वह राजनीति के इस महायोद्धा को कचोटती आ रही है, जिसे वह अक्सर बयां भी कर देते हैं।

राजनीति में कायम है बृजभूषण सिंह का दबदबा
कुश्ती के अखाड़े के पहलवान रहे बृजभूषण शरण सिंह को राजनीति का योद्धा माना जाता है। मनकापुर राजघराने के कुंवर आनंद सिंह और उनके पुत्र गोण्डा सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा तथा बलरामपुर जिले के रिजवान ज़हीर जैसे दिग्गज नेताओं को चुनावी रण में शिकस्त देने वाले बृजभूषण यूं ही बाहुबली नहीं कहे जाते हैं, बल्कि राजनीति में कायम उनका दबदबा ही उन्हें बाहुबलियों की फेहरिस्त में लाकर खड़ा करता है।
हालांकि, अस्तबल में घोड़ों को काबू में करने वाले इस राजनीतिज्ञ के सितारे पिछले वर्ष से गर्दिश में चल रहे हैं। महिला पहलवानों के यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे बृजभूषण को 2024 में भाजपा ने लोकसभा चुनाव न लड़ाकर उनके छोटे बेटे करन भूषण सिंह को कैसरगंज से मैदान में उतारा था। हालांकि, खुद चुनाव न लड़ पाने का बृजभूषण को आज भी मलाल है, जो टीस बनकर आए दिन उभरता रहता है।

स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की शान में कसीदे पढऩे के पीछे भी तलाशे जा रहे राजनीतिक निहितार्थ
बृजभूषण शरण को करीब से जानने-समझने वाले कहते हैं कि वह ऐसे नेताओं में से नहीं हैं, जो पार्टी का हर फैसला स्वीकार कर लें। जब फैसला अपने मुताबिक न हो तो वे तेवर दिखाने में जरा सा भी नहीं हिचकते हैं। पिछले दिनों एक यूट्यूब चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में बृजभूषण शरण सिंह ने एक वाकये का जिक्र करते हुए स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के शान में कसीदे पढ़े तो सियासी हलकों में हलचल मच गयी। सपाइयों ने उनके इस बयान को हाथों-हाथ लपक लिया और सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ।
बृजभूषण ने मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोगों को बुरा लगेगा, लेकिन मैं विपक्ष का सांसद था और मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। मैं मिलने के लिए गया। वह लिफ्ट में बैठ चुके थे। जैसे उन्होंने देखा तो लिफ्ट को रोककर बाहर आ गए। पूर्व सांसद ने चिठ्ठी के राज़ से भी पर्दा उठाया और कहा कि शाम को चार बजे मैं मुलायम सिंह यादव को चिठ्ठी देकर आया और साढ़े चार बजे डीएम का फोन आ गया कि आपका काम हो गया है। बृजभूषण शरण सिंह के इस बयान के बाद सियासी हलकों में हलचल मच गयी है।

दो धुर राजनीतिक विरोधियों की खुशनुमा माहौल में हुई मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल
वहीं दूसरी तरफ 27 अप्रैल को बृजभूषण शरण सिंह बलरामपुर जिले के तुलसीपुर क्षेत्र में एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे, जहां गोण्डा की करनैलगंज सीट से पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री तथा बृजभूषण के धुर राजनीतिक विरोधी योगेश प्रताप सिंह से स्नेहिल भेंट हुई। दशकों बाद बृजभूषण सिंह और योगेश सिंह की खुशनुमा माहौल में हुई मिलन की तस्वीर जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो चर्चा और कयासबाजी का सबब बन गयी। वैसे तो बृजभूषण शरण सिंह अपने बेबाक अंदाज और बयानों को लेकर आए दिन सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन हाल में दिए गए बयानों और सपा नेता योगेश प्रताप सिंह के साथ उनकी मुलाकात देवीपाटन मंडल के साथ ही पूर्वांचल की सियासत में नयी इबारत लिखने की ओर इशारा कर रही है!
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