Gonda Politics: राजनीतिक ‘ध्रुवों’ को खोने से देवीपाटन मंडल में शून्य हो गयी सपा

समाजवादी पार्टी को खेवैया की तलाश, चारों जिलों में नहीं है कोई करिश्माई व्यक्तित्व का नेता

Sandesh Wahak Digital Desk/A.R.Usmani: वर्ष 2018 में समाजवादी पार्टी ने अपने दिग्गज नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री वकार अहमद शाह को हमेशा के लिए खोया, तो उसे करारा झटका लगा। हालांकि, वकार के बेटे यासर शाह व बहू मारिया अली की सक्रियता पार्टी के लिए संजीवनी साबित हुई। इसके बाद साल 2021 में गोण्डा के दिग्गज नेता रहे पूर्व मंत्री पंडित सिंह की कोरोना से मौत हो गई। उनके आकस्मिक निधन के बाद से जिले में पार्टी मृतप्राय हो गई। वहीं जनवरी 2024 में पूर्व मंत्री व बलरामपुर जिले की गैंसड़ी सीट से विधायक रहे डॉ एसपी यादव की मौत ने न सिर्फ समाजवादी पार्टी को अपूर्णीय क्षति पहुंचाई, बल्कि मंडल में साइकिल की रफ्तार को रोक दिया।

दिग्गजों के निधन से मंडल में टूट गयी समाजवादी पार्टी की कमर

बताते चलें कि बहराइच जिले के दिग्गज नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री वकार अहमद शाह मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी थे। देवीपाटन मंडल में उनका काफी दबदबा था। वे पांच बार विधायक रहे। हृदय संबंधी समस्या के बाद कोमा की स्थिति में 20 जून 2013 को उन्हें लखनऊ के डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अप्रैल 2018 में उनका इंतकाल हो गया। हालांकि, वकार की विरासत उनके पुत्र यासर शाह व बहू मारिया अली ने संभाल ली। चुनाव जीतने के बाद यासर अखिलेश यादव सरकार में मंत्री बनाए गए लेकिन 2022 का विधानसभा चुनाव हार गए।

हालांकि, यासर की पत्नी मारिया अली मटेरा से विधायक निर्वाचित हो गयीं। वकार शाह की मौत के दो साल बाद ही समाजवादी पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब गोण्डा के दिग्गज नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री विनोद कुमार पंडित सिंह उर्फ पंडित सिंह का 7 मई 2021 को कोरोना वायरस की चपेट में आने से मौत हो गई। अपने करिश्माई नेता को खोने के बाद से जिले में समाजवादी पार्टी अब तक उबर नहीं पाई है। यह बात दीगर है कि उनके भाई नरेन्द्र सिंह, पुत्र डॉ अभिषेक सिंह व भतीजे सूरज राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन जनता के बीच अपनी अलग छवि न बना पाने के कारण ये हाशिए पर हैं और समाजवादी पार्टी यहां ‘नेता-विहीन’ है।

बहराइच के वकार शाह, गोण्डा के पंडित सिंह और बलरामपुर जिले के डॉ एसपी यादव थे स्तम्भ

वकार शाह और पंडित सिंह के निधन के बाद बलरामपुर की गैंसड़ी सीट से विधायक पूर्व मंत्री डॉ शिव प्रताप यादव ही थे, जिन्हें देवीपाटन मंडल में पार्टी का मजबूत स्तंभ माना जाता था, लेकिन 26 जनवरी 2024 को उनका भी आकस्मिक निधन हो गया। बलरामपुर के महारानी लाल कुवंरि पीजी कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता के रूप में डॉ. शिव प्रताप यादव ने एक जुलाई 1980 में नौकरी संभाली थी। वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हाेंने लोकदल से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। साल 1980 में वह बलरामपुर सदर से विधानसभा का पहला चुनाव लड़े थे। वर्ष 1986 में वह लोकदल के जिलाध्यक्ष बने और 1989 में जनता दल से गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े।

देवीपाटन मंडल में शून्य सी हो गयी समाजवादी पार्टी

इसके बाद 1991 में समाजवादी जनता पार्टी से चुनाव लड़े, लेकिन इन चुनावों में वे जीत नहीं सके थे। वर्ष 1993 में सपा ने उन्हें गैसड़ी से टिकट दिया और वह पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2002, 2012, 2022 में भी यहीं से समाजवादी पार्टी के विधायक चुने गए। साल 2003 में मुलायम सिंह की सरकार में वह कृषि राज्य मंत्री, 2005 में उत्तर प्रदेश वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष, 2012 में जंतु उद्यान राज्यमंत्री तथा 2015 में चिकित्सा स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाए गए थे।

डॉ शिव प्रताप यादव को तराई का गांधी कहा जाता था। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र गैसड़ी के साथ ही पूरे देवीपाटन मंडल में काफी लोकप्रिय थे। सजातीय मतदाताओं में उनकी अच्छी पैठ और दबदबा था। मंडल के तीन राजनीतिक ध्रुवों को खोने के बाद देवीपाटन मंडल में समाजवादी पार्टी शून्य सी हो गयी है। चारों जिलों में कोई करिश्माई व्यक्तित्व का नेता नहीं है, जो पार्टी के लिए संजीवनी साबित हो सके।

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