Gorakhpur News: घर-परिवार से जुड़ी हर जानकारी थी पड़ोसी को, इसी का फायदा उठाकर रची अपहरण की साजिश
Gorakhpur News: गोरखपुर में रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी अशोक जायसवाल के अपहरण की गुत्थी आखिरकार सुलझ गई है। पुलिस की रिमांड पर लिए गए आरोपी कमालुद्दीन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पूछताछ में सामने आया कि अशोक के ही पड़ोसी प्रदीप सोनी ने व्यापार में हुए घाटे को पूरा करने और कर्ज से बचने के लिए अपहरण की साजिश रची थी। दरअसल, प्रदीप सोनी ने अशोक जायसवाल के अस्पताल में ज्वेलरी की दुकान खोली थी, जो घाटे में चली गई। साथ ही उसने कमालुद्दीन से पांच लाख रुपये उधार भी ले रखे थे। पैसे लौटाने की जगह प्रदीप ने अपने साथी तरुण त्रिपाठी के साथ मिलकर अशोक का अपहरण करने की योजना बनाई। तरुण ने गैंगस्टर मोनू त्रिपाठी को शामिल किया और फिर करुणेश दुबे व कमालुद्दीन तक यह प्लान पहुंचा।

लोकेशन सीसीटीवी से ट्रैक की गई
सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि प्रदीप के पास अशोक के घर और अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे का एक्सेस था, क्योंकि अशोक ने उसका ड्राइवर अपने यहां काम पर रखा था। पासवर्ड न बदलने की वजह से प्रदीप सात दिन तक कैमरे की मॉनिटरिंग करता रहा और वारदात के दिन मोनू व तरुण ने वीडियो कॉल के जरिए लोकेशन ट्रैक की। इसके बाद 25 जुलाई को रेलवे स्टेडियम जाते समय कौआबाग अंडरपास से अशोक का अपहरण कर लिया गया। अशोक की पत्नी डॉ. सुषमा जायसवाल को अपहरण के कुछ देर बाद ही एक करोड़ रुपये फिरौती की कॉल आई। पुलिस ने अलर्ट होकर कार्रवाई शुरू की और करीब 15 घंटे के अंदर अशोक को सकुशल बरामद कर तीन बदमाशों को पकड़ लिया। जबकि मुख्य आरोपी कमालुद्दीन फरार हो गया था। उस पर 50 हजार का इनाम भी घोषित हुआ, लेकिन उसने चालाकी से रायबरेली कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

रिमांड पर खुला राज़
पुलिस ने कोर्ट से 28 घंटे की रिमांड मंजूर कराई और रायबरेली जेल से कमालुद्दीन को गोरखपुर लाकर सख्त पूछताछ की। इसी दौरान यह साफ हुआ कि अपहरण के पीछे पड़ोसी प्रदीप सोनी का हाथ है, जिसने व्यापारिक घाटे और कर्ज से बचने के लिए यह साजिश रची थी। फिलहाल पुलिस प्रदीप सोनी समेत अन्य आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि बहुत जल्द पूरे मामले में शामिल सभी आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

