Lucknow News: पुरानी पेंशन और निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, आंदोलन की चेतावनी
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर मुखर हो गए हैं। उप्र राज्य कर्मचारी महासंघ की राज्य कमेटी की बैठक बुधवार को जयहिंद चबूतरा, उदयगंज लखनऊ में आयोजित की गई। राज्य अध्यक्ष कमल अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सैकड़ों की संख्या में पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण का विरोध और महंगाई भत्ते (DA) के बकाए को जारी करने जैसी प्रमुख मांगों को लेकर चर्चा हुई।

केंद्र सरकार से 8वें वेतन आयोग की मांग
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बैठक में बतौर मुख्य वक्ता कहा कि केंद्र सरकार ने घोषणा के साढ़े सात महीने बाद भी 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की जगह यूपीएस जैसी योजना लाकर कर्मचारियों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।

निजीकरण और संविदा कर्मियों पर जताई नाराजगी
महासंघ के राज्य अध्यक्ष कमल अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम को निजी हाथों में सौंपने के फैसले की निंदा की। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को औने-पौने दामों में बेच रही है और सरकारी विभागों को भी छोटा कर रही है। उन्होंने संविदा कर्मियों को नियमित करने की मांग की और सरकार के उस प्रस्ताव पर नाराजगी जताई जिसमें उन्हें सेवानिवृत्ति तक संविदा पर ही रखने की बात कही गई है।

आंदोलन की चेतावनी
महासंघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने कर्मचारियों की लंबित मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया और बातचीत से कोई समाधान नहीं निकाला, तो वे विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। बैठक में संगठन के कई वरिष्ठ नेता जैसे एसपी सिंह, कमलेश मिश्रा और अशोक सिंह भी मौजूद रहे। अशोक सिंह ने बताया कि सरकार नए पदों का सृजन नहीं कर रही है और न ही खाली पदों को भर रही है, जबकि वर्कलोड लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े पूंजीपतियों के कर्ज माफ कर रही है, लेकिन 18 महीने के बकाया DA/DR को जारी नहीं कर रही है।
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