गैस संकट रोकने को सरकार ने लागू किया ESMA, रसोई गैस और सीएनजी को मिलेगी प्राथमिकता
Sandesh Wahak Digital Desk: खाड़ी देशों में जारी युद्ध के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन प्रावधान लागू कर दिए हैं। सरकार ने प्राकृतिक गैस (सप्लाई रेगुलेशन) आदेश 2026 जारी किया है, जिसके तहत अब देश में उपलब्ध गैस का बंटवारा प्राथमिकता (Priority) के आधार पर किया जाएगा। इसका सीधा मकसद यह है कि युद्ध के बावजूद आपकी रसोई का चूल्हा जलता रहे और गाड़ियां चलती रहें।
क्या है ESMA और क्यों लगाया गया
ESMA यानी एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (1968) एक ऐसा कानून है जो जरूरी सेवाओं (जैसे गैस, बिजली, स्वास्थ्य) को बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए लगाया जाता है।
हड़ताल पर रोक: इस कानून के लागू होने के बाद गैस सप्लाई और वितरण से जुड़े कर्मचारी न तो हड़ताल कर सकते हैं और न ही काम पर आने से मना कर सकते हैं।
बाधा रहित सेवा: सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि युद्ध के माहौल में कोई भी घरेलू स्तर पर गैस की कमी का फायदा न उठा सके।
अब किसे मिलेगी कितनी गैस
सरकार ने गैस सप्लाई को चार मुख्य हिस्सों (Sectors) में बांट दिया है, ताकि सबसे जरूरी काम पहले हों।
1. सबसे पहली प्राथमिकता (रसोई और ट्रांसपोर्ट)
घरों में आने वाली पाइप वाली गैस (PNG), गाड़ियों की सीएनजी (CNG) और एलपीजी (LPG) सिलेंडर बनाने वाले प्लांट्स को 100% सप्लाई मिलती रहेगी। यानी आम आदमी की जरूरतों पर आंच नहीं आने दी जाएगी।
2. दूसरी प्राथमिकता (खेती-किसानी)
खाद (Fertilizer) बनाने वाले प्लांट्स को उनके पिछले 6 महीने के औसत की 70% गैस दी जाएगी, ताकि फसलों के लिए यूरिया और खाद की कमी न हो।
3. तीसरी प्राथमिकता (उद्योग और चाय बागान)
चाय उद्योग और बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स को 80% गैस सप्लाई की जाएगी। इसके लिए बाकायदा एक कमेटी निगरानी करेगी।
4. चौथी प्राथमिकता (कमर्शियल उपयोग)
होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गैस उपभोक्ताओं को भी उनकी जरूरत का 80% हिस्सा मिलता रहेगा।
प्राथमिक क्षेत्रों (जैसे घर और खेती) की जरूरतें पूरी करने के लिए सरकार पेट्रोकेमिकल यूनिट्स और पावर प्लांट्स को दी जाने वाली गैस में कटौती कर सकती है। तेल शोधन (Oil Refinery) कंपनियों को भी फिलहाल 65% सप्लाई पर ही गुजारा करना होगा।

