GST घोटाले का महाखुलासा: यूपी STF ने दबोचे ‘बोगस फर्म’ गिरोह के मास्टरमाइंड

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने सोमवार देर रात गाजियाबाद के दिलशाद एक्सटेंशन इलाके में छापेमारी कर एक बड़े संगठित गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपी मोहम्मद शादाब और मोहम्मद आलम, कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में बनाकर जीएसटी (GST) चोरी का एक बड़ा नेटवर्क चला रहे थे। इनके निशाने पर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे कई राज्य थे।

कैसे हुआ इस ‘सफेदपोश’ ठगी का खुलासा?

इस पूरे मामले की जड़ें सहारनपुर के थाना सदर बाजार में दर्ज एक मुकदमे (शौर्या एंटरप्राइजेज से संबंधित) से जुड़ी हैं। जीएसटी विभाग ने जब जांच की, तो पाया कि कई फर्में केवल कागजों पर चल रही हैं। सहारनपुर पुलिस ने इस जटिल तकनीकी घोटाले को सुलझाने के लिए एसटीएफ मुख्यालय से मदद मांगी।

पुलिस उपाधीक्षक प्रमेश कुमार शुक्ल के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। एसटीएफ की टीम जब गाजियाबाद और दिल्ली एनसीआर में अभिसूचना संकलित कर रही थी, तब मुखबिर से पक्की सूचना मिली कि इस घोटाले के मुख्य किरदार भगत सिंह चौक, डीएलएफ दिलशाद एक्सटेंशन के पास छिपे हुए हैं। टीम ने घेराबंदी कर शादाब और आलम को दबोच लिया। इनके पास से लैपटॉप, कई मोबाइल फोन और बैंक चेकबुक बरामद हुई हैं।

मोडस ऑपेरंडी: व्हाट्सएप पर चलता था करोड़ों का खेल

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला है। शादाब और उसका साथी मोहसिन (जो फिलहाल फरार है) खुद को अकाउंटेंसी का जानकार बताते थे। उनके काम करने का तरीका कुछ इस तरह था। आरोपी गरीब या अनजान लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग राज्यों के पते पर बोगस फर्में रजिस्टर करते थे। ये फर्में बिना किसी वास्तविक माल के केवल ‘फर्जी इनवॉइस’ और ‘ई-वे बिल’ काटती थीं। माल की आवाजाही को सच दिखाने के लिए ये लोग एक फर्जी फर्म से दूसरी फर्जी फर्म के बीच बैंक ट्रांजेक्शन दिखाते थे। असल में न तो कोई सामान ट्रक पर लदता था और न ही कहीं पहुंचता था।

ये लोग उन असली फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट बेचते थे, जो अपना टैक्स बचाने के चक्कर में फर्जी बिल मांगती थीं। असली फर्म मालिक इन्हें व्हाट्सएप पर अपनी जरूरत और रकम का विवरण भेजते थे, और बदले में ये लोग फर्जी बिल जनरेट कर देते थे।

15 ईमेल आईडी और 100 करोड़ का साम्राज्य

आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में 15 से अधिक ऐसी ईमेल आईडी मिली हैं, जिनका इस्तेमाल केवल फर्जी रिटर्न फाइल करने और बैंक ओटीपी (OTP) प्राप्त करने के लिए किया जाता था। शादाब ने कुबूल किया कि उसने हैदराबाद, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों (जैसे लखनऊ और सहारनपुर) में दर्जनों फर्जी फर्में बनाई थीं।

अकेले लखनऊ के पते पर RAM ENTERPRISES और SHIV TRADERS जैसी तीन बड़ी बोगस फर्में पाई गईं। शुरुआती जांच में यह आंकड़ा 100 करोड़ रुपये के पार निकल गया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि विस्तृत ऑडिट के बाद यह घोटाला कई गुना बड़ा हो सकता है।

क्या होगा अगला कदम?

एसटीएफ ने गिरफ्तार आरोपियों को सहारनपुर पुलिस के हवाले कर दिया है, जो उन्हें न्यायालय में पेश करेगी। इस गिरोह के मुख्य सरगना मोहसिन और उनके अन्य सहयोगियों समर, तुफैल और रहमान की तलाश में दिल्ली और गाजियाबाद में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।

यह कार्रवाई उन व्यापारियों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है जो टैक्स बचाने के लिए फर्जी इनवॉइस का सहारा लेते हैं। एसटीएफ अब उन ‘वास्तविक फर्मों’ की भी सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इस गिरोह से फर्जी बिल खरीदे थे।

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