लखनऊ में GST कर चोरी के सिंडिकेट का भंडाफोड़, 4.70 करोड़ का फर्जी लेन-देन उजागर, 3 जालसाज गिरफ्तार
Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ पुलिस ने जीएसटी (GST) चोरी के एक ऐसे बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है जो फर्जी फर्में बनाकर सरकार को चूना लगा रहा था। इस गिरोह ने कागजों पर करोड़ों का लेन-देन दिखाया और लाखों की टैक्स चोरी की।
पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल, सर्विलांस और महानगर थाने की संयुक्त टीम ने संगठित तरीके से जीएसटी चोरी करने वाले एक शातिर गिरोह को दबोचा है। यह गिरोह फर्जी कंपनियां बनाकर बोगस इनवॉइस (बिल) जारी करता था और सरकार को मिलने वाले राजस्व को अपनी जेब में भर रहा था।
कैसे चलता था धोखाधड़ी का खेल?
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बहुत ही शातिराना ढंग से काम करता था। ये लोग जरूरतमंद और गरीब लोगों को 10-15 हजार रुपये का लालच देते थे। उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते जैसे जरूरी दस्तावेज ले लिए जाते थे।
इन दस्तावेजों और फर्जी बिजली बिलों/किरायानामों के आधार पर ‘के.एस. इण्टर प्राइजेज’ जैसी फर्जी फर्में रजिस्टर्ड कराई गईं। पुलिस के मुताबिक, इस एक फर्म के जरिए करीब 4 करोड़ 70 लाख रुपये का फर्जी लेन-देन (Invoice) दिखाया गया, जिससे लगभग 37 लाख रुपये की जीएसटी चोरी की गई। फर्जी ई-वे बिल और इनवॉइस जनरेट किए जाते थे ताकि कागजों पर यह बिजनेस बिल्कुल असली नजर आए।
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी
पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।
दीपक कुमार: यह फर्नीचर का काम करता था और इसके नाम पर ही फर्जी खाते संचालित थे। दीपक पहले भी हत्या के मामले में जेल जा चुका है।
प्रशान्त तिवारी: दीपक का साथी, जिसने फर्जीवाड़े के पैसों से अपने घर के काम पूरे किए। इसके पास से पासपोर्ट भी बरामद हुआ है।
कैलाश मौर्या: बी.एससी पास कैलाश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, लेकिन उसने फर्जी मुहरें बनाकर इस गिरोह की मदद की।

क्या-क्या हुआ बरामद?
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से अहम सबूत जुटाए हैं।
4 मोबाइल फोन (जिनका इस्तेमाल सिंडिकेट चलाने में होता था)।
विभिन्न बैंकों की चेकबुक और पासबुक (HDFC, कोटक महिंद्रा, PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा)।
एक पासपोर्ट और अन्य संदिग्ध दस्तावेज।
मुख्य मास्टरमाइंड अभी भी फरार
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का एक और अहम सदस्य अनुपम गोगोई, जिसने फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया था, अभी फरार है। पुलिस की टीमें उसकी तलाश में दबिश दे रही हैं। राज्य कर विभाग (GST Department) के उपायुक्त अशोक कुमार त्रिपाठी की शिकायत पर यह पूरी कार्रवाई की गई।

