हरदोई जिला समाज कल्याण अधिकारी सस्पेंड: भ्रष्टाचार और लापरवाही पर मंत्री असीम अरुण का कड़ा प्रहार

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए हरदोई के जिला समाज कल्याण अधिकारी (DSWO) रमाकांत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है। रमाकांत पर चयन प्रक्रिया में धांधली, पेंशन योजनाओं में लापरवाही और सरकारी रिपोर्टिंग में अनियमितता के गंभीर आरोप हैं।

निलंबन के मुख्य कारण: जांच में खुली पोल

जांच रिपोर्ट में रमाकांत के खिलाफ कई गंभीर बिंदु सामने आए हैं।

जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों (चठिया धनवार और कछौना) में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ की संविदा भर्ती के लिए जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से फर्म चयन में जानबूझकर देरी की गई। फाइल को दो महीने तक लटकाया गया और अपात्र फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए गलत तथ्य पेश किए गए।

‘जीरो पॉवर्टी योजना’ के तहत वृद्धावस्था पेंशन के लिए चिन्हित 1219 पात्र परिवारों में से केवल 116 परिवारों का डेटा पोर्टल पर दर्ज किया गया। इससे हजारों गरीब बुजुर्ग सरकारी लाभ से वंचित रह गए।

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित गांवों के सर्वे फॉर्म समय पर जमा नहीं किए गए, जिससे विकास कार्यों की प्रगति रुक गई। जनसमस्याओं के निस्तारण के लिए आयोजित ‘समाधान दिवस’ के प्रति उदासीन रवैया अपनाना और अनुशासनहीनता।

अनुशासनात्मक कार्रवाई और जांच

रमाकांत के इस कृत्य को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 का खुला उल्लंघन माना गया है। मामले की विस्तृत जांच के लिए उप निदेशक जे. राम को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह कार्रवाई संदेश देती है कि गरीब कल्याण की योजनाओं में किसी भी स्तर की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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