आजमगढ़ में वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीज जमीन पर बैठकर ले रहा ऑक्सीजन
Azamgarh News: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मंडलीय अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों ‘वेंटिलेटर’ पर नज़र आ रही है। इसका एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह एक मरीज ज़मीन पर बैठकर खुद से ऑक्सीजन लगा रहा है। इस दौरान न तो स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी मौके पर दिखा और न ही कोई कर्मचारी। यह वीडियो जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग दे रहा सफाई, मंत्री के दावों पर सवाल
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अब सफाई देने में जुटे हुए हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी सीएम बृजेश पाठक भले ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतरीन बताते हों, लेकिन आजमगढ़ जिले की यह घटना उनके दावों की हकीकत बयां कर रही है। जिले में इससे पहले भी एंबुलेंस में धक्का लगाने और मरीज को स्ट्रेचर न मिलने जैसे मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर नतीजा हमेशा ‘सिफर’ ही रहा है।
क्या था पूरा मामला
यह पूरा मामला आजमगढ़ जिले के तरवा थाना क्षेत्र के रहने वाले राजू यादव (22) से जुड़ा है, जिन्हें टीबी की बीमारी के कारण 17 जुलाई को आजमगढ़ के मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंडलीय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि मरीज को चेस्ट इन्फेक्शन हुआ था और उसने बिस्तर पर ही टॉयलेट कर दिया था। इसी बीच जब चादर बदली जा रही थी, तभी किसी ने यह वीडियो बना लिया। चिकित्सा अधीक्षक का यह भी कहना है कि इस मामले में सिस्टम इंचार्ज से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इसके साथ ही, मरीज की देखभाल के लिए दो डॉक्टर लगाए गए हैं और उसे वार्ड में भी शिफ्ट कर दिया गया है। यदि मरीज को यहां राहत नहीं मिलती है, तो उसे रेफर भी किया जाएगा।
ऑक्सीजन प्लांट के कर्मचारियों को 10 माह से नहीं मिला वेतन
आजमगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था की इस बदहाली की एक बड़ी वजह सामने आई है। कोरोना संक्रमण काल में आजमगढ़ के मंडलीय अस्पताल में ऑक्सीजन का प्लांट लगाया गया था, जिससे पूरे अस्पताल के सभी बेड पर ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती थी। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्लांट पर तैनात तीन कर्मचारी अजय सिंह, राहुल राम और इंद्रमणि पाण्डेय को पिछले 10 महीने से वेतन नहीं मिला है।
वेतन न मिलने के कारण ऑक्सीजन की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है और मरीजों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के सहारे ऑक्सीजन दी जा रही है। इस पूरे मामले में अस्पताल में तैनात एक बाबू मनीष तिवारी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि अस्पताल प्रशासन अपने इन कर्मचारियों को वेतन कब दिलवाता है और जो भी लोग इसके पीछे दोषी हैं, उन पर क्या कार्रवाई करता है। यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।
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