Health News: दिल की बीमारी भारत में मौत की सबसे बड़ी वजह, SGPGI निदेशक ने दी गंभीर चेतावनी
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत में हृदय संबंधी बीमारियां लगातार गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS), लखनऊ के सहयोग से ‘UP STEMI केयर प्रोग्राम’ की शुरुआत की है।

यह पहल ST-Elevation Myocardial Infarction (STEMI)— दिल के दौरे का सबसे जानलेवा प्रकार — से होने वाली मौतों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने कार्यक्रम में बताया कि भारत में कार्डियो-वैस्कुलर डिजीज (CVD) सभी कारणों से होने वाली कुल मौतों में से 28% से अधिक के लिए जिम्मेदार है।
खासतौर पर कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) भारतीयों को अन्य देशों की तुलना में एक दशक पहले प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि “युवा भारतीयों में CAD की दर 12–16% है, जो किसी भी जातीय समूह में सबसे अधिक है।”
उत्तर प्रदेश में स्थिति और भी गंभीर है, जहां हर साल करीब 5 लाख STEMI मामले सामने आते हैं।
प्रो. धीमन के अनुसार, 40 से 69 वर्ष की आयु के लोगों में CAD से होने वाली मौतों का अनुपात 25% तक है, जबकि 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में यह आंकड़ा 10% तक पहुंच चुका है।
देरी, संसाधनों की कमी और जागरूकता का अभाव
हृदयाघात के शुरुआती लक्षणों को आमजन द्वारा पहचान न पाने, परिवहन व्यवस्था की कमी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ईसीजी, प्रशिक्षित स्टाफ तथा आपात दवाओं की अनुपलब्धता के कारण समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
हब-एंड-स्पोक मॉडल और टेलीमेडिसिन की मदद
STEMI केयर प्रोग्राम इस समस्या के समाधान के रूप में एक हब-एंड-स्पोक मॉडल को अपनाता है। इसके तहत:
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जिला अस्पताल और सीएचसी (स्पोक) स्तर पर फाइब्रिनोलिटिक थेरेपी (जैसे टेनेटेप्लेस) द्वारा इलाज की शुरुआत की जाएगी।
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इसके बाद मरीजों को SGPGI जैसे हब अस्पतालों में रेफर किया जाएगा, जहां PCI (पर्क्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन) किया जाएगा।
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टेली-ईसीजी और सेंट्रल व्याख्या हब के ज़रिए रिमोट लोकेशनों से तुरंत निदान और इलाज की शुरुआत हो सकेगी।
नेतृत्व और भागीदारी
प्रो. आदित्य कपूर, हेड, कार्डियोलॉजी विभाग, SGPGI ने इसे “यूपी में रोकी जा सकने वाली हृदय मौतों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि” बताया।
वहीं डॉ. अंकित साहू, एडिशनल प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी ने कहा कि यह कार्यक्रम संसाधन-सीमित इलाकों में हृदय देखभाल की मानक प्रणाली बन सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य डॉ. पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इसे “डॉक्टर-सरकार की मजबूत साझेदारी” बताते हुए कहा कि “यह पहल जीवनरक्षक उपचार तक समान पहुंच सुनिश्चित करने का उदाहरण है।”
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