‘कमिश्नर नहीं, ये तो ‘कमीशनर’ है’, अखिलेश यादव बोले- भाजपाई भ्रष्टाचार से हो रहा संतों का अपमान
Sandesh Wahak Digital Desk: संगम की रेती पर लगने वाला आस्था का माघ मेला अब सियासत के अखाड़े में तब्दील हो गया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के मामले में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अखिलेश ने प्रयागराज की मंडलायुक्त (कमिश्नर) IAS सौम्या अग्रवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो साझा करते हुए बेहद तीखे और गंभीर आरोप लगाए हैं।

‘कमिश्नर नहीं, ये तो ‘कमीशनर’ हैं’
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भाजपा के राज में मेले के नाम पर हजारों की रकम कमीशन के रूप में गटक जाने का खेल चल रहा है। उन्होंने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा “भाजपा को कमिश्नर की जगह ‘कमीशनर’ की नई पोस्ट बना देनी चाहिए। शासन-प्रशासन संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार इसलिए कर रहा है क्योंकि ‘मेला महाभ्रष्टाचार’ में सबकी हिस्सेदारी है। जो भी बदइंतजामी के खिलाफ बोलेगा, वह इन ‘संगीधिकारियों’ के निशाने पर होगा।”
अखिलेश के साथ-साथ सपा के अन्य सांसदों ने भी सरकार पर हमला बोला। बलिया सांसद सनातन पांडेय ने सरकार को अलोकतांत्रिक बताते हुए शंकराचार्य को नोटिस जारी करने पर गहरी नाराजगी जताई। सुल्तानपुर सांसद रामभुआल निषाद ने कहा कि इस सरकार में शंकराचार्य जैसे पूजनीय संत भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने बनारस के मणिकर्णिका घाट मामले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा मंदिरों का इस्तेमाल अपने स्वार्थ के लिए करती है।
प्रशासन की सफाई: “सुरक्षा हमारी प्राथमिकता”
दूसरी तरफ, विवाद बढ़ता देख प्रशासन ने अपना पक्ष रखा है। मेलाधिकारी ऋषिराज ने प्रेस वार्ता में बताया कि शंकराचार्य के समर्थकों ने बैरिकेडिंग तोड़कर संगम नोज की तरफ जाने की कोशिश की थी।
प्रशासन का कहना है कि मुख्य स्नान पर्व पर वाहनों की अनुमति नहीं थी और भगदड़ की स्थिति से बचने के लिए कदम उठाए गए। मेलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी संत का अपमान नहीं किया गया है और न ही किसी को स्नान करने से रोका गया है। श्रद्धालु और कल्पवासियों की सुरक्षा सबसे ऊपर है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों का आरोप है कि उन्हें संगम स्नान के लिए जाते समय प्रशासन ने रोका और उनके साथ बर्बरता की गई। वहीं प्रशासन इसे सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन से जोड़कर देख रहा है। इस खींचतान ने अब लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की राजनीति को गरमा दिया है।
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