प्रसिद्ध Neem Karoli Baba मंदिर के दान पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को भेजा नोटिस

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रसिद्ध नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के दान को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। मामला तब अदालत तक पहुंचा जब एक स्थानीय व्यक्ति ने मंदिर ट्रस्ट के खातों में पारदर्शिता नहीं होने पर सवाल उठाए। अदालत ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए सरकार को नोटिस जारी किया है।

उठाए पारदर्शिता पर सवाल

दरअसल पिथौरागढ़ जिले के बासिखेत निवासी ठाकुर सिंह दसीला ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर बताया कि Neem Karoli Baba मंदिर का संचालन करने वाले ट्रस्ट की बुनियादी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन की जानकारी, कार्यालय का पता, ट्रस्टियों की संख्या और उनकी नियुक्ति से जुड़ा रिकॉर्ड आधिकारिक दस्तावेजों में उपलब्ध नहीं है। दसीला का कहना है कि जब मंदिर में हर साल करोड़ों रुपये का दान आता है तो उसके प्रबंधन की जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है।

वहीं इस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि Neem Karoli Baba मंदिर में आने वाले दान में विदेशों से आने वाले भक्तों का बड़ा योगदान शामिल है। इसके बावजूद आय, खर्च और ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। दसीला का कहना है कि इससे फंड के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

याचिका में यह भी बताया गया कि देश के बड़े मंदिरों का संचालन कानून के तहत गठित समितियों या प्राधिकरणों द्वारा किया जाता है। उदाहरण के तौर पर बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर का प्रबंधन एक विशेष कानून के तहत होता है, जबकि जागेश्वर मंदिर की देखरेख जिला प्रशासन करता है।

सार्वजनिक जानकारी की मांग

दरअसल ट्रस्ट एक्ट 1882 के तहत धार्मिक ट्रस्टों को अपना ट्रस्ट डीड, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, ट्रस्टियों की जानकारी, संपत्ति का विवरण और सालाना ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करनी होती है। जिसके तहत दसीला ने मांग की है कि Neem Karoli Baba मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन में गांव के लोगों और सम्मानित नागरिकों को भी शामिल किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस

वहीं मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। जिस दौरान अदालत ने सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब मंदिर में बड़ी रकम का दान आता है, खासकर विदेशों से भी, तो प्रबंधन में पारदर्शिता बहुत जरूरी है।

विश्व प्रसिद्ध मंदिर और बढ़ती बहस

वहीं नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) मंदिर विश्व प्रसिद्ध है और यहां देश विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की आध्यात्मिक मान्यता और चमत्कारों की वजह से यहां भारी भीड़ और चढ़ावा आता है।

जिसके बाद हाईकोर्ट का यह दखल अहम कदम माना जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दान की राशि धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सही तरीके से खर्च हो। इस मामले ने उत्तराखंड में धार्मिक ट्रस्टों के प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सरकार को अदालत को बताना होगा कि मंदिर में आने वाले दान का हिसाब किताब कैसे रखा जाता है और क्या सही निगरानी व्यवस्था मौजूद है।

 

Also Read: सीएम योगी के जापान दौरे पर अखिलेश ने कसा तंज, बोले- जा रहे हैं तो देख आइएगा काशी अब तक क्योटो क्यों नहीं बनी

Get real time updates directly on you device, subscribe now.