अवैध हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त, 65 वर्षीय बुजुर्ग को कोर्ट में पेश करने का आदेश, एसएसपी भी तलब
Sandesh Wahak Digital Desk: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के 65 वर्षीय महमूद बेग की कथित अवैध हिरासत के मामले में सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने एडीजी, आईजी और एसएसपी को आदेश दिया है कि 8 सितंबर को महमूद बेग को अदालत में पेश किया जाए। साथ ही बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य को भी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाज़िर होने का निर्देश दिया गया है।
परिवार का आरोप – पुलिस ने घर से उठाया
महमूद बेग के परिवार का आरोप है कि 20 जुलाई की रात पुलिस उन्हें घर से जबरन उठाकर ले गई थी। तब से उनका कोई पता नहीं चल रहा। परिवार को अब उनकी जान की भी चिंता सता रही है।
बेग की पत्नी परवीन अख्तर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। बेटे मुदस्सिर का कहना है कि 20 जुलाई की रात लगभग 11 लोग तीन वाहनों से आए और पिता को जबरन उठाकर ले गए। जब उसने विरोध किया तो खुद को पुलिसकर्मी बताने वाले एक व्यक्ति ने उस पर बंदूक तान दी और धमकाया। घर पर लगे सीसीटीवी कैमरों में भी पुलिस के वाहन कैद हुए हैं।
परिवार का दावा है कि थोड़ी देर बाद कुछ पुलिसकर्मी फिर से घर लौटे और महमूद बेग की शुगर की दवा मांगी, क्योंकि उनकी हालत बिगड़ रही थी। मुदस्सिर ने आरोप लगाया कि जब उसने उनका पीछा किया तो पुलिसकर्मी उसे पुलिस लाइंस के पास एक इमारत में ले गए और पिता की सुरक्षित रिहाई के लिए 1 लाख रुपये की मांग की। बाद में पता चला कि वे लोग बरेली पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के सदस्य थे।
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
परिवार ने बताया कि कई बार शिकायत करने और IGRS पोर्टल पर दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील एहतेशाम अफसर खान ने अदालत में दलील दी कि बिना एफआईआर, गिरफ्तारी या वारंट के किसी को उठाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

