देश के श्रम कानूनों में ऐतिहासिक बदलाव, अब 40 करोड़ से ज्यादा कामगारों को मिलेगा बेहतर संरक्षण

Sandesh Wahak Digital Desk: मोदी सरकार ने देश के श्रमिकों के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने पुराने और जटिल पड़ चुके 29 श्रम कानूनों को खत्म करते हुए देशभर में चार नए, सरल लेबर कोड लागू कर दिए हैं। सरकार का मानना है कि यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी छलांग है, जो न सिर्फ कामगारों के जीवन को बेहतर बनाएगा, बल्कि उद्योगों को भी नई रफ्तार देगा। आइए, समझते हैं कि ये नए नियम आम कामगार और कंपनियों के लिए कैसे बदलाव लेकर आए हैं।

1. पुराने कानूनों को मिली नई ज़िंदगी

देश के कई श्रम कानून आज़ादी से पहले और उसके तुरंत बाद, यानि 1930-1950 के बीच बने थे। उस ज़माने में ऐप-बेस्ड काम, गिग वर्कर्स या प्रवासी मज़दूरों जैसी आधुनिक चीजों का अस्तित्व ही नहीं था। नए कोड इन सभी नए तरह के कामगारों को कानूनी सुरक्षा देंगे।

2. नौकरी का ऑफर लेटर अब अनिवार्य

अब हर कंपनी को कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना ही होगा। इसके साथ ही, पूरे देश में न्यूनतम वेतन लागू होगा और वेतन समय पर देना कानूनन ज़रूरी होगा। इससे नौकरी में पारदर्शिता आएगी और कर्मचारियों को सुरक्षा का अहसास होगा।

3. मुफ्त स्वास्थ्य जांच का लाभ

40 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों को अब साल में एक बार मुफ्त हेल्थ चेक-अप की सुविधा मिलेगी। खनन, रसायन और निर्माण जैसे खतरनाक माने जाने वाले उद्योगों में काम करने वालों के लिए पूरी स्वास्थ्य सुरक्षा का इंतजाम किया जाएगा।

4. ग्रेच्युटी का बड़ा तोहफा

यह श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है। पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए किसी एक कंपनी में लगातार 5 साल काम करना जरूरी था। अब सिर्फ 1 साल की नौकरी के बाद ही कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार हो जाएगा। यह प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ा फायदा है।

5. महिलाओं के लिए नई संभावनाएं

महिलाएं अब रात की शिफ्ट में भी काम कर सकती हैं, बशर्ते उनकी सहमति हो और कंपनी ने उनकी सुरक्षा का पूरा प्रबंध किया हो। नए कोड में समान काम के लिए समान वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल की गारंटी भी दी गई है। ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को भी समान अधिकार मिलेंगे।

6. गिग वर्कर्स के लिए ऐतिहासिक पहल

ओला-उबर के ड्राइवर, जोमैटो-स्विगी के डिलीवरी पार्टनर जैसे ऐप आधारित कामगारों को पहली बार कानूनी मान्यता मिली है। अब वे सामाजिक सुरक्षा के लाभ पाने के हकदार होंगे। इन प्लेटफॉर्म कंपनियों को अपने टर्नओवर का 1-2% सामाजिक सुरक्षा फंड में देना होगा।

7. ओवरटाइम का दोगुना पैसा

अब अगर कोई कर्मचारी ओवरटाइम करता है, तो उसे उसके नॉर्मल वेतन के दोगुने रेट पर भुगतान मिलेगा। इससे ओवरटाइम के भुगतान में पारदर्शिता आएगी।

8. कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को मिली नई हकूकियत

कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों को भी अब न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और काम की निश्चितता जैसे लाभ मिलेंगे, जो पहले सिर्फ स्थाई कर्मचारियों के लिए थे। प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के मजदूर भी अब सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं।

9. उद्योगों के लिए राहत

कंपनियों के लिए अब कानूनों का पालन करना आसान होगा। सिंगल लाइसेंस और सिंगल रिटर्न की व्यवस्था लागू होगी, जिससे उद्योगों को लालफीताशाही से छुटकारा मिलेगा और व्यवसाय करना सरल होगा।

10. विवाद सुलझाने का आसान तरीका

अब श्रमिक और कंपनी के बीच के झगड़ों को सुलझाने का तरीका बदल गया है। अधिकारी इंस्पेक्टर की जगह फैसिलिटेटर की भूमिका में होंगे, जो जुर्माना लगाने की बजाय मार्गदर्शन देंगे। दो-सदस्यीय ट्राइब्यूनल बनाए जाएंगे ताकि कर्मचारी सीधे तौर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।

सरकार का कहना है कि ये चारों कोड Code on Wages 2019, Industrial Relations Code 2020, Social Security Code 2020 और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code 2020 मिलकर ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को साकार करने में एक मजबूत नींव का काम करेंगे।

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