100 करोड़ से ज्यादा के होम लोन फ्रॉड का खुलासा, STF ने गिरोह के सरगना सहित 8 ठगों को दबोचा

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कूटरचित दस्तावेज़ों का उपयोग कर फर्जी प्रोफाइल बनाकर विभिन्न बैंकों से ₹100 करोड़ से अधिक का होम लोन लेकर गबन करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। STF ने इस गिरोह के सरगना सहित आठ अभियुक्तों को गौतमबुद्ध नगर से गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण

STF फील्ड यूनिट गौतमबुद्ध नगर ने 4 दिसंबर 2025 को दोपहर 3:00 बजे सूरजपुर थाना क्षेत्र से इन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया।

  • रामकुमार (सरगना, पूर्व बैंक लोन एग्जीक्यूटिव, गाजियाबाद)
  • नितिन जैन (दिल्ली)
  • मो. वसी (कंपनी सेक्रेटरी/लीगल एंड रिस्क मैनेजर, झारखंड)
  • शमशाद आलम (बिहार)
  • इन्द्रकुमार कर्माकर (गुरुग्राम, हरियाणा)
  • अनुज यादव (गाजियाबाद)
  • ताहिर हुसैन (संभल)
  • अशोक उर्फ दीपक जैन उर्फ रिंकी (दिल्ली)

बरामदगी और साक्ष्य

अभियुक्तों के पास से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी में इस्तेमाल हुए उपकरण और दस्तावेज़ बरामद किए गए।

बैंक दस्तावेज़: 126 चेकबुक/पासबुक और 170 विभिन्न बैंकों के ATM कार्ड।

पहचान पत्र: 45 आधार कार्ड, 27 पैन कार्ड, 5 वोटर आईडी कार्ड।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: 26 मोबाइल फोन (अपराध में प्रयुक्त) और 3 लैपटॉप।

वाहन: 3 लक्जरी गाड़ियां (टाटा हैरियर, महिंद्रा टीयूवी, किआ सेल्टोस)।

अन्य: फर्जी आईडी कार्ड, होम लोन से संबंधित रजिस्ट्री और एग्रीमेंट की कई प्रतियां।

गिरोह की कार्यप्रणाली और वित्तीय गबन

गिरोह का सरगना रामकुमार (MBA पास, पूर्व में HDFC और Axis बैंक में लोन एग्जीक्यूटिव) था, जो बिल्डरों और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से इस धोखाधड़ी को अंजाम देता था।

रामकुमार ने टीएसए सॉफ्टवेयर सर्विसेज और ट्रिपटेकी प्राइवेट लिमिटेड जैसी फर्जी कंपनियां पंजीकृत कराईं। ये कंपनियां फर्जी आधार कार्ड पर बनाए गए व्यक्तियों को डायरेक्टर बनाती थीं। बैंक कर्मियों की मिलीभगत से इन फर्जी व्यक्तियों के नाम पर खाते खोले जाते थे। खातों में फर्जी सैलरी भेजकर मजबूत फर्जी प्रोफाइल तैयार की जाती थी, जिसके आधार पर विभिन्न बैंकों से होम लोन और पर्सनल लोन लिए जाते थे। गैंग के सदस्य मौ. वसी (CS, MBA, LLB) और शमशाद आलम बिहार के उन लोगों को तलाशते थे जो गल्फ कंट्री में नौकरी करते हैं। उन्हें लालच देकर उनकी प्रोफाइल पर लोन कराकर संपत्तियां खरीदी जाती थीं।

धोखाधड़ी से प्राप्त धन को छुपाने के लिए, अभियुक्त अशोक कुमार, नितिन जैन, कर्माकर आदि ने फर्जी व्यक्तियों के नाम पर 20 से अधिक शेल फर्मों का निर्माण किया था, जिनमें धन की साइफनिंग की जाती थी। गैंग ने मृत महिला रतना वासुदेवा की दिल्ली स्थित संपत्ति को शाहिदा अहमद नामक महिला को खड़ा करके सनाउल्ला अंसारी के नाम कराया और बैंक से ₹4.8 करोड़ का लोन प्राप्त कर गबन किया।

कानूनी कार्रवाई

प्रारंभिक साक्ष्यों से ₹100 करोड़ से अधिक के लोन फ्रॉड की पुष्टि हुई है। इस धोखाधड़ी में उत्तर प्रदेश (नोएडा, लखनऊ, बनारस), उत्तराखंड (हरिद्वार), चंडीगढ़, दिल्ली और गुरुग्राम के कई बिल्डरों की मिलीभगत ज्ञात हुई है। बरामदगी से ज्ञात हुए लगभग 220 बैंक खातों को फ्रीज करा दिया गया है।

गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध थाना सूरजपुर, गौतमबुद्धनगर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2)B एवं आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

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