मानव संपदा पोर्टल को ठेंगा, सरकारी विभागों में ऑफलाइन तबादलों का खेल
Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: तबादलों में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार रोकने के मकसद से सीएम योगी के आदेश पर जिस मानव संपदा पोर्टल का गठन किया गया है। उसको अफसरों ने ताख पर रखते हुए इस बार भी ऑफलाइन तबादलों का खाका खींचा है।

इसके लिए तबादला नीति पर जारी मुख्य सचिव के शासनादेश में दिए ‘यथासंभव’ शब्द को मनमानी करने का हथियार बनाया गया है। मेरिट बेस्ड ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया पूरी तरह हाशिये पर है। सटीक उदाहरण वो पशुपालन विभाग है। जहां कार्मिकों को अवकाश की अर्जी भी मानव सम्पदा पोर्टल के जरिये ही आगे बढ़ानी होती है। यहां शासन से लेकर निदेशालय के अफसर तबादले सिर्फ ऑफलाइन ही करने की जद्दोजहद में जुटे हैं।

बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप
आगरा के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ मनोज कुमार ने तबादलों में बड़े पैमाने पर संभावित भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीएम के साथ नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग से शिकायत की है। आरोपों के घेरे में प्रमुख सचिव से लेकर शासन के अफसर व निदेशक पशुपालन हैं। सात और नौ मई को निदेशक पशुपालन डॉ जयकेश पांडेय ने विभागीय अफसरों को पत्र भेजकर तबादला नीति के दायरे में आने वाले समूह क, ख, ग और घ संवर्ग के अफसरों-कार्मिकों का ब्योरा मांगा है। समूह क और ख के कार्मिकों के प्रार्थना पत्र तीन विकल्पों के साथ दस मई तक मांगे गए हैं। समूह क के तबादले विभागाध्यक्ष की संस्तुति पर शासन करता है। समूह ग और घ संवर्ग के कार्मिकों के सेवा विवरण का प्रारूप जारी करके 18 मई तक विवरण मांगा गया है।

तबादले मानव संपदा पोर्टल के जरिये किये जाने का जिक्र उक्त पत्रों से नदारद है। शिकायत में तबादलों की एवज में होने वाली करोड़ों की धनउगाही का रेट चार्ट भी दिया है। समूह ग के कार्मिकों से तबादला विकल्प नहीं मांगा गया है। शासन के अफसरों पर समूह क के अफसरों की एसीआर में भी धनउगाही के आरोप लगाए गए हैं। भ्रष्टाचार की जांच विजिलेंस से कराने की मांग हुई है।
चंद दिनों में प्रमुख सचिव व निदेशक का रिटायरमेंट
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निदेशक बोले, शासन से अनुमति मांगी
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