आई लव मोहम्मद विवाद पहुंचा दिल्ली हाईकोर्ट, FIR रद्द करने और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बहराइच में ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर प्रकरण को लेकर दर्ज एफआईआर और की गई गिरफ्तारियों का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुँच गया है। कई मुस्लिम संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तार किए गए लोगों को तत्काल रिहा करने की मांग की है।
शांतिपूर्ण त्योहार को दंगा बताकर फंसाने का आरोप
हाईकोर्ट में दायर इस जनहित याचिका (PIL) में यह दलील दी गई है कि बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों पर, जो शांतिपूर्वक अपना त्योहार मना रहे थे, उन पर दंगा करने, आपराधिक धमकी देने और शांति भंग करने जैसे झूठे आरोप लगाकर मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
याचिका के अनुसार, बहराइच के पुलिस स्टेशन काइसरगंज में दर्ज एफआईआर में याचिकाकर्ताओं को झूठा फँसाया गया है। इन लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस, 2023) की कई धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

दिहाड़ी मजदूरों और छात्रों को फंसाने का दावा
याचिकाकर्ताओं की दलील है कि ये सभी दिहाड़ी मजदूर, छात्र और साधारण परिवार वाले लोग हैं, और उनका एकमात्र अपराध यह है कि उन्होंने पोस्टर, बैनर और शांतिपूर्ण सभाओं के माध्यम से अपना त्योहार मनाया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक अभिव्यक्ति के उनके संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 25 और 26) का सम्मान करने के बजाय, उन्हें बिना किसी ठोस सबूत के बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा बदनाम किया गया और झूठे आरोपों में फँसाया गया।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले (बिजॉय इमानुएल बनाम केरल राज्य, 1986) का हवाला देते हुए कहा गया है कि धार्मिक आस्था के कारण राष्ट्रगान न गाने जैसे निष्क्रिय धार्मिक अभिव्यक्ति भी संविधान द्वारा संरक्षित है। इसलिए, त्योहार के हिस्से के रूप में पोस्टर लगाने के उनके शांतिपूर्ण कार्य को एफआईआर के माध्यम से अपराध नहीं बनाया जा सकता।
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