बृजभूषण की दूरगामी रणनीति का हिस्सा है ‘आई लव मुहम्मद’ और हिन्दू राष्ट्र की हिमायत!

बृजभूषण शरण सिंह के सांसद बेटे करण भूषण ने भी किया भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाए जाने का समर्थन

गोण्डा। राज इलाहाबादी का एक मशहूर शेर है ‘कैसे-कैसे हैं रहबर हमारे, कभी इस किनारे, कभी उस किनारे।’ ये पंक्तियां छह बार सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह पर सटीक बैठ रही हैं। भले ही बृजभूषण भाजपा में साइड लाइन कर दिए गए हों, लेकिन उनके दबदबे, रसूख, बेबाक और बेअंदाज बयानी में तनिक भी कमी नहीं आई है।

सूबे में सियासत का रूख भांप रहे बीजेपी के पूर्व बाहुबली सांसद

आई लव मुहम्मद को लेकर जब सूबे की सियासत गर्म है और बरेली में बवाल ने देश के अन्य राज्यों में भी हलचल मचा दी है। ऐसे में पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा आई लव मुहम्मद की हिमायत करना न सिर्फ सरकार की कार्रवाई को कटघरे में खड़ा करता है, बल्कि पुलिस-प्रशासन के एक्शन पर भी बड़ा सवाल है। दरअसल, कभी समाजवादी पार्टी का हिस्सा रहे भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह का मुस्लिम-प्रेम जगजाहिर है। अयोध्या आंदोलन से उपजे इस बाहुबली नेता ने राजनीति में अपनी बदौलत मुकाम हासिल किया।

Brij Bhushan Singh

राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी है बृजभूषण शरण सिंह

भाजपा से सांसद निर्वाचित होने वाले बृजभूषण पर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को 13 दिन में गिराने का भी कलंक है। सूबे में सत्ता परिवर्तन की आहट मिलने पर बृजभूषण ने साइकिल की सवारी कर ली थी और उन्होंने सपा के टिकट पर कैसरगंज से चुनाव लड़कर न सिर्फ मुसलमानों का वोट हासिल किया, बल्कि उनकी हमदर्दी और सहानुभूति भी प्राप्त की। राजनीति के मंझे खिलाड़ी बृजभूषण शरण सिंह 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले घर वापसी कर फिर भाजपा में शामिल हो गए और कैसरगंज से सांसद चुने गए।

वर्ष 2024 में पार्टी ने उन्हें साइड लाइन कर दिया और काफी जद्दोजहद के बाद उनके छोटे बेटे करण भूषण सिंह को कैसरगंज से चुनावी दंगल में उतार दिया। गौरतलब है कि बृजभूषण के बड़े बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोण्डा सदर सीट से लगातार दूसरी बार भाजपा से विधायक हैं। बताते चलें कि वर्ष 2023 में बृजभूषण शरण सिंह ने भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाए जाने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि भारत हिन्दू राष्ट्र है। इसी आधार पर देश का बंटवारा हुआ था।

बृजभूषण का ‘मुस्लिम-प्रेम’ महज दिखावा है या सियासत?

उन्होंने कहा था कि हालांकि इसे धर्मनिरपेक्ष के रूप में लिया गया और गलत ढंग से परिभाषित किया गया। उस समय उनके बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई थी। हालांकि, मुसलमानों को यह बात नागवार गुजरी थी। वहीं अब उनके सांसद पुत्र करण भूषण सिंह ने बाबा बागेश्वर धाम के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने इस बार हर हाल में हिन्दू राष्ट्र बनाए जाने की मांग की है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि गाहे-बगाहे मुसलमानों का पक्ष लेकर अपनी ही सरकार और सिस्टम को कटघरे में खड़ा करने वाले बृजभूषण शरण सिंह का यह ‘मुस्लिम-प्रेम’ महज दिखावा है या सियासत?

Brij Bhushan Sharan Singh

क्या भाजपा का दामन छोड़ने वाले हैं बृजभूषण?

सूत्र बताते हैं कि बृजभूषण शरण सिंह की यह सधी हुई राजनीतिक रणनीति का वह हिस्सा है, जिसे वह भविष्य में इस्तेमाल भुनाना चाहते हैं। उसी के मद्देनजर वह मुसलमानों की गाहे-बगाहे हिमायत करते रहते हैं, जिससे उन पर कट्टर हिंदूवादी नेता होने का ठप्पा न लगे। बृजभूषण को करीब से जानने वाले बताते हैं कि राजनीति के महारथी बृजभूषण शरण सिंह अब और ज्यादा समय तक भाजपा में रहने वाले नहीं हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता परिवर्तन की आहट मिलते ही वे पार्टी बदल सकते हैं! यदि सूबे में सत्ता बदलने की आहट नहीं सुनाई देगी तो वे बीजेपी में ही रहकर सरकार और सिस्टम को कटघरे में खड़ा करते रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि बृजभूषण हवा का रूख भांप रहे हैं। हिन्दू राष्ट्र और आई लव मुहम्मद की हिमायत उनकी इसी रणनीति का हिस्सा है।

रिपोर्ट: ए.आर. उस्मानी

 

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