“हमारी शादी होगी तो हम भी आबादी बढ़ाएंगे”, Dhirendra Shastri ने हिंदुओं को दी 4 बच्चे पैदा करने की सलाह

Sandesh Wahak Digital Desk: बागेश्वर धाम सरकार के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Shastri) एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। राजस्थान के पुष्कर में आयोजित तीन दिवसीय हनुमान कथा के दौरान उन्होंने हिंदुओं की घटती आबादी, मुसलमानों की घर वापसी और अजमेर दरगाह जाने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उनके इन बयानों ने एक बार फिर जनसंख्या और धार्मिक पहचान से जुड़े सवालों को बहस के केंद्र में ला दिया है।

चार बच्चे पैदा करने की सलाह

देश में जनसंख्या संतुलन के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri) ने इसे भारत का बड़ा और वैश्विक विषय बताया। उन्होंने कहा कि घटते हिंदू और बढ़ते मजहबी लोग देश को बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं। उनका तर्क था कि देश की स्थिरता के लिए हिंदुओं की संख्या का संतुलित रहना आवश्यक है। इसी संदर्भ में उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत के ‘तीन बच्चे’ वाले बयान से एक कदम आगे बढ़ते हुए हिंदुओं को कम से कम चार संतानें पैदा करने की सलाह दे डाली।

वहीं आबादी बढ़ाने के अपने सुझाव पर संभावित कटाक्षों का जवाब देते हुए धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri) ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अभी उनकी शादी नहीं हुई है, इसलिए लोग सवाल करेंगे कि उनका क्या योगदान है। उन्होंने कहा कि जब उनका विवाह हो जाएगा तो वे भी हिंदुओं की आबादी बढ़ाने में अपना पूरा योगदान देंगे। साथ ही उन्होंने दोहराया कि हिंदुओं को कम से कम चार संतानें पैदा करनी चाहिए।

मुसलमानों की ‘घर वापसी’ पर दिया बयान

वहीं भारतीय मुसलमानों की जड़ों को लेकर भी धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri) ने टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि भारत में रहने वाले सभी मुसलमानों के पूर्वज हिंदू ही थे। अपने तर्क को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने एक फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ का उदाहरण देते हुए कहा कि अंत में तीनों का पिता कन्हैयालाल ही निकला था। उनका कहना था कि यदि भारतीय मुसलमान इस सच्चाई को समझ लें तो उनकी घर वापसी का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

अजमेर जाने वाले हिंदुओं को नसीहत

वहीं अजमेर शरीफ की दरगाह पर मत्था टेकने वाले हिंदुओं को लेकर भी Dhirendra Shastri ने अपनी राय रखी। गीता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने अपने धर्म में जीने और चलने को श्रेष्ठ बताया है। उनके अनुसार हिंदुओं के पास करोड़ों देवी-देवता हैं और उन्हें अपने आराध्यों की ही भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरे मजहब के लोगों को अपनी सेवा करने दें और हिंदुओं को वहां जाने की आवश्यकता नहीं है।

 

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