अवैध ढाबे और खराब सड़के हैं हादसों की वजह: सुप्रीम कोर्ट

Sandesh Wahak Digital Desk: देश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त रुख अपनाया है। यहां सोमवार को शीर्ष अदालत ने राजस्थान और तेलंगाना में हाल ही में हुए दर्दनाक सड़क हादसों का स्वतः संज्ञान (Suo Moto Cognizance) लिया। कोर्ट ने कहा कि हाइवे किनारे बने अवैध ढाबे और खराब सड़कों की स्थिति इन दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों में से हैं।

हाइवे किनारे अवैध ढाबों पर कोर्ट की चिंता

जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाइवे के किनारे बने ढाबों पर आने वाले लोग अक्सर अपनी गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी कर देते हैं, जिससे बड़े हादसे होते हैं। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर एक सर्वे रिपोर्ट पेश करें। इस रिपोर्ट में यह बताया जाए कि कितने ढाबे राजमार्गों के किनारे ऐसे क्षेत्रों में बने हैं, जिन्हें इस तरह की सुविधाओं के लिए अधिसूचित नहीं किया गया है, यानी अवैध ढाबों की पूरी सूची तैयार की जाए।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब टोल टैक्स वसूला जा रहा है, तब सड़कों की गुणवत्ता खराब क्यों है? अदालत ने कहा कि हाल ही में राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना में हुए सड़क हादसे इसकी बड़ी मिसाल हैं। दरअसल 2 नवंबर को फलोदी हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी, जब जोधपुर से बीकानेर जा रही एक टेम्पो ट्रैवलर भारतमाला राजमार्ग पर ढाबे के पास खड़े ट्रक से जा टकराई। इसके अलावा, तेलंगाना में हुई दुर्घटना में 18 और 19 लोगों की मौतें दर्ज की गईं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे हादसे यह दिखाते हैं कि सड़क सुरक्षा और रखरखाव के मानक गंभीर रूप से उपेक्षित हैं।

गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों को भी नोटिस

यहां अदालत ने सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य से जुड़े ठेकेदारों द्वारा अपनाए जाने वाले मानकों की भी जांच का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अक्सर ठेकेदार गुणवत्ता से समझौता करते हैं, जिससे हादसे बढ़ते हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि NHAI और सड़क परिवहन मंत्रालय विशेष रूप से राजस्थान और तेलंगाना के उन दो राजमार्गों पर विस्तृत रिपोर्ट दें, जहां ये हादसे हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केवल सड़क एजेंसियों की नहीं, बल्कि राज्यों और केंद्र सरकार की भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इसलिए कोर्ट ने गृह मंत्रालय को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया है। साथ ही, उन सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी करने को कहा गया है, जिन राज्यों से संबंधित ये राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं।

यहां अदालत ने कहा है कि दो सप्ताह के भीतर अवैध ढाबों की पहचान, सड़क की गुणवत्ता, और रखरखाव की स्थिति पर पूरी रिपोर्ट दाखिल की जाए। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।

 

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