IMF ने भारत से बढ़ते तनाव को बताया बड़ा खतरा, पाकिस्तान पर लगाए 11 नई शर्तें

नई दिल्ली: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत की रकम पाने के लिए अब और भी कड़े नियमों का सामना करना पड़ेगा। IMF ने पाकिस्तान को दिए जा रहे 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज के बदले 11 नई शर्तें थोप दी हैं। इसके साथ ही IMF ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को एक बड़े जोखिम के रूप में चिह्नित किया है, जो पाकिस्तान के वित्तीय और सुधार कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकता है।

पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इन शर्तों में 17.6 लाख करोड़ रुपये के नए बजट को मंजूरी देना, बिजली बिलों पर कर्ज अदायगी से जुड़ा अधिभार बढ़ाना, और तीन साल से अधिक पुराने इस्तेमालशुदा वाहनों के आयात पर लगी पाबंदियों को हटाना शामिल है। शनिवार को जारी हुए स्टाफ लेवल रिपोर्ट में IMF ने कहा कि बीते दो हफ्तों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा है। हालांकि, अभी तक इसका सीधा असर बाजारों पर सीमित रहा है। शेयर बाजार में हालिया बढ़त कायम है और बांड पर जोखिम प्रीमियम में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है।

IMF ने पाकिस्तान के आगामी वित्तीय वर्ष के रक्षा बजट को 2.414 लाख करोड़ रुपये दिखाया है, जो कि पिछले साल की तुलना में 12% अधिक है। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने IMF से भी ज्यादा 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित करने का संकेत दिया है, जो भारत के साथ हालिया तनाव के बाद 18% की बढ़ोतरी को दर्शाता है। एक नई अहम शर्त यह भी है कि पाकिस्तान सरकार को वित्त वर्ष 2026 का बजट IMF के स्टाफ लेवल समझौते के अनुरूप संसद से पारित कराना होगा। इसकी समय सीमा जून 2025 तक रखी गई है।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक IMF द्वारा पाकिस्तान पर कुल 50 शर्तें लगाई जा चुकी हैं। इसके अलावा, IMF ने प्रांतों को कृषि आयकर कानून लागू करने की भी शर्त दी है। इसके तहत रिटर्न फाइलिंग, करदाता पंजीकरण, जागरूकता अभियान और अनुपालन सुधार की पूरी योजना बनाई जानी है। इस पर अमल की अंतिम तिथि जून 2025 रखी गई है। एक अन्य नई शर्त के तहत पाकिस्तान को IMF की गवर्नेंस डायग्नोस्टिक असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर एक “गवर्नेंस एक्शन प्लान” प्रकाशित करना होगा। इसका उद्देश्य देश की प्रशासनिक और संस्थागत कमजोरियों को सार्वजनिक रूप से उजागर कर उन्हें सुधारने की दिशा में कदम उठाना है। इन तमाम शर्तों से साफ है कि IMF की सहायता राशि पाने के लिए पाकिस्तान को कठोर आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों से गुजरना होगा, साथ ही भारत के साथ रिश्तों में बढ़ती तल्खी भी उसकी राह को और कठिन बना रही है।

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