जामिया प्रदर्शन में पहुंचे इमरान मसूद और मोहिबुल्लाह नदवी, दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया
Jamia Millia Islamia Protest: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन में अब विपक्षी नेताओं की भी एंट्री हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Imran Masood) और समाजवादी पार्टी के रामपुर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी (Mohibullah Nadvi) छात्रों को समर्थन देने पहुंचे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। नदवी को बाद में छोड़ दिया गया।
यूनिवर्सिटी में 12 अक्टूबर से छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग पर प्रदर्शन (Jamia Protest) चल रहा है। इसी बीच परिसर की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे मिलने के बाद विवाद बढ़ गया। प्रशासन ने इन नारों को केमिकल की मदद से मिटा दिया है।
इमरान मसूद बोले, विवादित नारों का समर्थन नहीं
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वह परिसर की दीवारों पर लिखे किसी भी विवादित पोस्टर या नारे का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा, “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, लेकिन प्रशासन छात्र संघ की बहाली क्यों नहीं कर रहा है?”
वहीं, रामपुर से सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को छात्रों से मिलने जाते समय रास्ते में रोककर हिरासत में लिया गया। नदवी ने दिल्ली पुलिस पर धक्का-मुक्की और बदसलूकी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जामिया का पूर्व छात्र होने के नाते छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना उनका फर्ज है। बाद में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।
यूनिवर्सिटी जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग
विवादित नारों के मामले में प्रशासन का कहना है कि जहां नारे लिखे गए थे, वहां लगे CCTV कैमरों के तार काटे गए थे। अधिकारियों ने दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।
विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने जामिया की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग कर दी है। आने-जाने वालों की जांच और पूछताछ की जा रही है। बिना जांच-पड़ताल के किसी को भी यूनिवर्सिटी की तरफ जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
प्रदर्शनकारी (Jamia Millia Islamia Protest) छात्र-छात्राएं छात्र संघ चुनाव का कार्यक्रम जारी करने की मांग पर अड़े हैं। छात्राओं ने भी एकजुट होकर मार्च निकाला और कहा कि चुनाव का शेड्यूल घोषित होने तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, प्रशासन ने छात्र संघ के नए संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई है, लेकिन प्रदर्शनकारी तत्काल चुनाव की तारीखों के ऐलान की मांग कर रहे हैं।
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