UP News: आयकर विभाग भी आईएएस के आर्थिक मायाजाल के आगे बेबस

दम तोड़ गया आपरेशन बाबू साहेब, कई छापेमारियों में यूपी के नौकरशाहों का नाम आया लेकिन साबित हुए आई एम सेफ

Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: यूपी में आईएएस अफसरों को आई एम सेफ कहा जाता है। केंद्रीय एजेंसियों के अफसर भले नप जाएं, आईएएस का बाल बांका नहीं बिगड़ता।

 

खासतौर से यूपी में आयकर विभाग की जांचों में जितने आईएएस का नाम सुर्खियों में आया, उनमें से एक पर भी कार्रवाई मुकाम तक नहीं पहुंची। विभाग ने आपरेशन बाबू साहेब नाम से नौकरशाही के धनकुबेरों के खिलाफ पूर्व में जो आपरेशन शुरू किया। वो भी दम तोड़ चुका है। एमआई बिल्डर ग्रुप की जांच के दौरान तकरीबन आधा दर्जन आईएएस अफसरों का नाम आया। पूर्व आईएएस राकेश बहादुर और संजीव सरन का नाम भी प्रकाश में आया। सिर्फ राकेश बहादुर की सौ करोड़ से ज्यादा की पार्टनरशिप बताई गयी। फिर भी आयकर विभाग के अफसर मानो सुप्तावस्था में हैं।

मायावती के करीबी के ठिकानों पर मिली थी हजार करोड़ की संपत्ति

2019 में आयकर छापों से सुर्खियों में आये पूर्व सीएम मायावती के सचिव रहे नेतराम के ठिकानों पर हुई छापेमारी में तकरीबन हजार करोड़ की सम्पत्तियां मिली। पचास-पचास लाख के चार पेन के साथ मुंबई, कोलकाता और दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में आलीशान मकान और 30 फर्जी कंपनियां भी प्रकाश में आयीं। करीब 200 करोड़ से ऊपर की सम्पत्तियां जब्त करने के बाद आयकर अफसर चुप्पी साध गए क्योंकि एक सेवारत अपर मुख्य सचिव का कनेक्शन सामने आ गया।

2018 में पूर्व आईएएस एसके सिंह के पास से लखनऊ से नोएडा तक खूब सम्पत्तियां मिलीं। विभागीय अफसरों के दयाभाव ने कार्यवाही आगे नहीं बढऩे दी। आपरेशन बाबू साहेब के नाम पर शालीमार गैलेन्ट की जांच में नौकरशाहों की तकरीबन सौ करोड़ की काली कमाई मिली। पिनटेल और अमरावती ग्रुप पर छापेमारी के दौरान कई कद्दावर आईएएस का आर्थिक साम्राज्य सामने आया। करोड़ों के आशियाने कौडिय़ों के भाव लिए गए थे।

आईएएस चन्द्रकला

कई धनकुबेर आईएएस से है रोहित सहाय का करीबी रिश्ता

पिनटेल समूह के मुखिया रोहित सहाय के बेहद करीबी रिश्ते कई धनकुबेर आईएएस अफसरों से हैं। बेनामी जांच इकाई ने आगे कार्रवाई के लिए दिल्ली मुख्यालय जांच रिपोर्ट भेजी। कार्रवाई का कोई पता नहीं है। खनन घोटाले में फंसी आईएएस चन्द्रकला और सफायर बिल्डर ग्रुप के बीच व्यापारिक संबंधों को तलाशने की मुहिम भी शुरू तो हुई, बस परवान चढऩे से पहले ही दम तोड़ गयी। पूर्व आईएएस और सपा के करीबी कुमार अरविन्द देव से जुड़े ठिकानों और स्टील फैक्ट्री पर भी छापेमारी हुई।

दीपक सिंघल

आयकर अफसरों को इस दौरान 60 लाख नकद और तीन किलो सोना के साथ पत्नी कई कंपनियों में निदेशक मिलीं। यहां भी जांच मानो ठन्डे बस्ते में जाते देर नहीं लगी। कोलकाता के हवाला कारोबारी से पूछताछ में प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव दीपक सिंघल का नाम आयकर विभाग के रडार पर आया तो जरूर, लेकिन कुछ ही वक्त में सिंघल की जांच भी गधे के सर से सींग के माफिक गायब हो गयी।

बड़ों पर हाथ रखते ही आयकर विभाग के अफसरों का हो जाता है ट्रांसफर

धनकुबेर आईएएस अफसरों के खिलाफ सबसे तगड़ा अभियान आयकर विभाग की इंन्वेस्टिगेशन इकाई के पूर्व अपर निदेशक ध्रुव पुरारी सिंह ने चलाया था। इस अफसर के हाथ कई दिग्गज आईएएस अफसरों का पूरा आर्थिक चिठ्ठा लगा था। लेकिन छापेमारी के बाद इस तेज तर्रार अफसर का तबादला ही लखनऊ यूनिट से कर दिया गया। इसके पीछे मोदी सरकार के करीब बैठे यूपी के एक रिटायर्ड अपर मुख्य सचिव का हाथ बताया जा रहा है। इसी तरह एक दशक पहले शालीमार ग्रुप पर छापेमारी के बाद तत्कालीन आयकर महानिदेशक कृष्णा सैनी का तबादला भी हो गया था।

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