सपा के खास एमआई बिल्डर की गोद में आयकर अफसर, जांच मैनेज!

Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava : नौकरशाहों-नेताओं और बिल्डरों के कुख्यात सिंडिकेट पर शिकंजा कसने का जिम्मा जिन केंद्रीय एजेंसियों पर हैं। उनके अफसरों पर संवेदनशील जांचों को यूपी में मैनेज करने के संगीन आरोप लग रहे हैं।

वित्त मंत्री से हुई शिकायत

आरोपों के घेरे में यूपी में आयकर विभाग की जांच इकाई के चंद बड़े अफसर हैं। शिकायत में छापेमारी के बाद बनने वाली विस्तृत जांच रिपोर्ट (अप्रेजल रिपोर्ट) के आंशिक तथ्य दिए हैं। जिससे खुद आयकर के बड़े बड़े अफसर हैरान हैं। सपा के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीबी लखनऊ के चर्चित एमआई बिल्डर ग्रुप के मुखिया कादिर अली की जांच को मटियामेट करने को लेकर वित्त मंत्री को भेजी शिकायत से विभाग में हडक़ंप है।

शिकायत में कितना सच है और कितना झूठ, इसका फैसला तभी हो सकता है, जब इसके तथ्यों की विस्तृत जांच कराई जाए। लेकिन अपनों पर आंच आती देख कोई भी अफसर जांच कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। पिछले वर्ष अक्टूबर में लखनऊ से नोएडा तक एमआई ग्रुप के तकरीबन 18 ठिकानों पर आयकर की जांच इकाई ने जबरदस्त छापेमारी की थी।

कई दिनों तक चली थी कार्रवाई

कई दिनों तक चली कार्रवाई के बाद भी अफसरों, नेताओं और न्यायाधीशों की काली कमाई को सफेद करने के आरोपी बिल्डर कादिर अली का बाल बांका आज तक क्यों नहीं बिगड़ा, इसका खुलासा इस शिकायत में है। आरोपों के मुताबिक छापेमारी के दौरान भारी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, ईमेल्स और क्लाउड स्टोरेज विभाग की जांच इकाई ने जब्त किया था। इसके लिए फोरेंसिक टीमों को बुलाया गया। 75 लाख रुपयों का बिल डेटा क्लोनिंग, रिकवरी ऑफ डिलीटेड फाइल्स समेत तमाम प्रकार के डिजिटल डाटा के परीक्षण के लिए दिया गया था।

फिलहाल फाइनल अप्रेजल रिपोर्ट से ऐसे डिजिटल डाटा को नदारद बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सिर्फ कादिर के जूनियर स्टाफ के मोबाइल के चंद गैरवाजिब प्रिंट आउट को रिपोर्ट में शामिल किया गया है। शिकायत के मुताबिक सर्च के पांचवें दिन सीज डिजिटल डाटा को रिप्लेस करके छेड़छाड़ की गयी है। बिल्डर कादिर अली, बेटे कासिम अली और सीए आकांक्षा टंडन के व्यक्तिगत डिजिटल डिवाइसेस से अहम डेटा नहीं मिलना दिखाया गया है।

कई घोटालों में सुर्खियां बटोर चुके हैं पूर्व आईएएस राकेश बहादुर

जबकि तीनों ही एमआई ग्रुप के सबसे अहम किरदार हैं। पूर्व सीएम अखिलेश यादव के प्रमुख सचिव रहे राकेश बहादुर के बेनामी साम्राज्य को भी खोजने में विभाग के अफसर नाकाम साबित हुए हैं। जबकि राकेश बहादुर पूर्ववर्ती सरकारों में कई घोटालों में नाम कमा चुके हैं। शिकायत में वित्त मंत्री से फोरेंसिक ऑडिट की मांग की गयी है।

जांच से जुड़े आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग के अफसरों पर उगाही रैकेट चलाने के भी आरोप हैं। कहा जा रहा है कि होम बायर्स, अफसरों और ठेकेदारों को तकरीबन 500 समन जारी किये गए थे। इससे आयकर विभाग को क्या जानकारी मिली, इसका कोई जि़क्र नहीं दिया गया है। समन लेने वाले लोगों से वसूली गयी घूस का रेटचार्ट भी इसमें दिया है। दो बीएचके फ्लैट मालिक से 10 लाख, तीन बीएचके से 15 से 20 लाख और नौकरशाहों से बेनामी ऐक्ट का डर दिखाकर 20 से 30 लाख वसूले जाने के गंभीर आरोप लगाये गये हैं।

धन उगाही की मांग पूरी होते ही अप्रेजल रिपोर्ट से नाम निकाले गये

आयकर अफसरों ने फाइनल अप्रेजल रिपोर्ट में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) से बिल्डर के प्रोजेक्टों का वैल्यूवेशन कराने की संस्तुति की है। इसका क्या नतीजा निकलेगा, ये तो वही आयकर अफसर बता सकते हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि ऐसा जानबूझकर आर्थिक अपराध को छुपाने के नजरिये से किया गया है। धन उगाही की मांग पूरी होते ही अप्रेजल रिपोर्ट से नाम निकाले गये हैं। ऐसे में टैक्स असेसमेंट और ऑनलाइन केस दोनों से ऐसे बायर्स बच जायेंगे। सिर्फ पैसा न देने वालों के नाम हैं। एमआई ग्रुप के मुखिया कादिर अली पर करोड़ों के भूमि फर्जीवाड़े के आरोप भी पहले से लगे हैं।

फर्जी तरीके से खड़ा किया एमआई सेंट्रल पार्क 

शिकायतकर्ता धन प्रकाश बुद्धि राजा की सरोजिनीनगर के सरसवां में अरबों की भूमि एमआई ग्रुप के मुखिया बिल्डर कादिर अली ने हड़पते हुए उस पर फर्जी तरीके से एमआई सेंट्रल पार्क खड़ा किया है। इसी प्रोजेक्ट में प्रभावशाली हस्तियों की काली कमाई खपाई गयी है। जिसमें पूर्व आईएएस और अखिलेश यादव के ख़ास राकेश बहादुर भी शामिल हैं। सिर्फ यही नहीं एमआई ग्रुप के इस प्रोजेक्ट में कई आयकर अफसरों और न्यायिक जगत की दिग्गज हस्तियों को तमाम आशियाने दिये गये हैं।

नतीजतन जांच की धार में पैनापन नजर नहीं आ रहा है। वित्त मंत्री, सीबीआई और सीबीडीटी के बड़े अफसरों को भेजी इस शिकायत में उच्च स्तरीय फोरेंसिक ऑडिट, आरोपी तीनों आयकर अफसरों के खिलाफ जांच, मामला तत्काल ईडी को भेजने और पुन: अप्रेजल रिपोर्ट तैयार करने समेत कई मांगे की गयी हैं। लेकिन इस शिकायत में लगाये गये गंभीर आरोपों की जांच कराने से आयकर विभाग के सभी अफसर किनारा कर रहे हैं।

महिला आरक्षण बिल

ऐसे आयकर अफसरों को जांच थमाई ही क्यों गई?

आयकर की जांच इकाई के तीन अफसरों के ऊपर एमआई ग्रुप की जांच मैनेज करने के गंभीर आरोप हैं। तीनों सपा के प्रमुख वोटबैंक की बिरादरी से आते हैं। अहम छापेमारी में इन तथ्यों को प्राथमिकता पर रखा जाता है। लेकिन शीर्ष अफसरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। माना जा रहा है कि अफसरों की आपसी जंग में शिकायत के बहाने जांच से जुड़े अहम तथ्य सार्वजनिक हुए हैं। कुछ समय पहले बड़ी महिला अफसर को इस इकाई से हटाया भी गया है।

आईआरएस का नाम आते ही बड़े आयकर अफसरों ने किया किनारा

मामला जानने के बाद प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (यूपी ईस्ट) विवेक मिश्रा ने मिलने से इनकार करके अपर आयकर आयुक्त मुख्यालय तकनीकी वीएस नेगी के पास संवाददाता को भेज दिया। श्री नेगी ने हाथ खड़े करते हुए आयकर कमिश्नर (प्रशासन) रिचा रस्तोगी के पास जाने को कहा। कमिश्नर दफ्तर से बाहर थीं। मामला जानने के बाद फोन पर उन्होंने कुछ भी बताने से इनकर कर दिया। भ्रष्टाचार में आईआरएस का नाम आते ही आयकर विभाग चुप्पी साधने में ही भलाई समझ रहा है। जांच कराने को काई तैयार नहीं है।

पहले की दो शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई : बुद्धिराजा

धन प्रकाश बुद्धिराजा ने कहा कि एमआई ग्रुप की शिकायत आयकर से 2019 और 2021 में की थी। कोई कार्रवाई नहीं हुई। आयकर विभाग के अफसरों की संलिप्तता हैं, तभी कार्रवाई नहीं हो रही है। सपा नेताओं, अफसरों और न्यायिक जगत की हस्तियों की काली कमाई को स$फेद किया गया है। बिल्डर कादिर अली ने मेरे साथ भूमि का बड़ा फर्जीवाड़ा कर रखा है।

आयकर महानिदेशक (जांच) बोले, प्रकरण संज्ञान में

यूपी के आयकर महानिदेशक (जांच) देबज्योति दास ने ‘संदेश वाहक’ से कहा कि अभी इस मामले में अप्रेजल रिपोर्ट नहीं आयी है। जांच बेहद गंभीरता से की जायेगी। थोड़ा इन्तजार कीजिये। जांच से जुड़े आयकर अफसरों पर लगे आरोपों की पूरी जानकारी है। इसका संज्ञान भी लिया गया है।

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