भारत-फ्रांस मेगा डिफेंस डील: वायुसेना को मिलेंगे 114 नए राफेल, अब भारत में ही होगा ‘सुपर फाइटर’ का निर्माण

Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता को वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर ले जाने के लिए भारत और फ्रांस एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते के अंतिम चरण में पहुंच गए हैं। अगले महीने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान 114 राफेल लड़ाकू विमानों के मेगा प्रोजेक्ट पर बड़ी घोषणा होने की उम्मीद है। यह सौदा न केवल वायुसेना में विमानों की कमी को दूर करेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

‘मेड इन इंडिया’ राफेल: हैदराबाद से जेवर तक फैलेगा जाल

इस बार यह डील सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक हस्तांतरण (ToT) पर केंद्रित है। ‘टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स’ और ‘डसॉल्ट एविएशन’ मिलकर हैदराबाद में राफेल का फ्यूजलेज (ढांचा) तैयार करेंगे। 2028 तक यहां से पहली यूनिट निकलने की उम्मीद है। विमान के शक्तिशाली इंजन का निर्माण भी अब भारत में ही करने की योजना है, जिसके लिए विशेष प्लांट स्थापित किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के जेवर में विमानों के रखरखाव और मरम्मत (Maintenance, Repair, and Overhaul) के लिए एक विशाल हब बनाया जा रहा है। इस सौदे की सफलता के बाद राफेल की कुल लागत का 60% हिस्सा भारत में ही निवेश होगा।

क्यों खास है राफेल?

राफेल एक ‘ओमनी-रोल’ लड़ाकू विमान है, जिसकी क्षमताएं इसे इस क्षेत्र में अजेय बनाती हैं। इसमें Meteor (300 किमी रेंज) और SCALP क्रूज मिसाइलें तैनात हैं, जिनका तोड़ फिलहाल पड़ोसी देशों के पास नहीं है। यह दुश्मन के रडार को जाम करने और मिसाइल हमलों को हवा में ही नाकाम करने में दुनिया का सबसे सटीक सिस्टम है। यह विमान लद्दाख जैसी अत्यधिक ऊंचाई और बर्फीली चोटियों से भारी पेलोड के साथ उड़ान भरने में पूरी तरह सक्षम है।

डील की प्रक्रिया और मंजूरी

सरकार-से-सरकार (G2G) आधार पर होने वाले इस सौदे को जल्द ही रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से औपचारिक मंजूरी मिलेगी। इसके बाद सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) इस अरबों यूरो के प्रोजेक्ट पर अंतिम मुहर लगाएगी।

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