अमेरिका से LPG और रूस से कच्चा तेल लेकर दो बड़े जहाज पहुंचे मंगलुरु बंदरगाह
Sandesh Wahak Digital Desk: दुनिया भर में सामान की सप्लाई (सप्लाई चेन) में आ रही दिक्कतों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर है। अमेरिका से द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और रूस से कच्चा तेल लेकर दो बड़े मालवाहक जहाज कर्नाटक के मंगलुरु बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गए हैं। यह खेप ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
अमेरिका के टेक्सास से आई LPG
जानकारी के अनुसार, अमेरिका के टेक्सास राज्य से एलपीजी लेकर आ रहा विशाल मालवाहक जहाज ‘पाइक्सिस पायनियर’ (Pyxis Pioneer) मंगलुरु बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण आपूर्ति मानी जा रही है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी कच्चे तेल से लदा एक अन्य जहाज भी मंगलुरु पहुंच गया है। यह जहाज फिलहाल बंदरगाह से लगभग 18 समुद्री मील दूर खड़ा है। इस तेल को पाइपलाइन के माध्यम से मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) तक पहुंचाने के लिए ‘सिंगल-पॉइंट मूरिंग सिस्टम’ (SPM) का उपयोग किया जाएगा।
खास बात यह है कि रूस से यह कच्चा तेल अमेरिका द्वारा जारी किए गए एक अस्थायी सामान्य लाइसेंस के बाद ही भारत पहुंच सका है। इस लाइसेंस के तहत 12 मार्च से समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति दी गई है। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
मध्य पूर्व संकट और भारत की रणनीति
अमेरिका से अनुमति मिलने के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है। ईरान से जुड़े संघर्ष और मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण पैदा हुई चिंताओं को दूर करने के लिए भारत सरकार ने यह कूटनीतिक और रणनीतिक फैसला लिया है।
जोखिम भरे रास्तों से होकर आ रही है सप्लाई
इससे पहले, नंदा देवी और शिवालिक नामक जहाज भी एलपीजी लेकर भारत आए थे। ‘नंदा देवी’ गुजरात के वडीनार बंदरगाह और ‘शिवालिक’ मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था। ये दोनों जहाज ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) जैसे बेहद जोखिम भरे समुद्री रास्ते से गुजरते हुए आए थे। ज्ञात हो कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण यह समुद्री रास्ता फिलहाल काफी अशांत और बाधित है।
सरकार पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क है। इस क्षेत्र में वर्तमान में कुल 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 611 भारतीय नाविक मौजूद हैं। ‘डीजी शिपिंग’ (DG Shipping) जहाज मालिकों, एजेंसियों और भारतीय मिशनों के समन्वय से स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

