दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर वायुसेना बनी Indian Air Force, चीन भी रह गया पीछे
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत की वायुसेना (Indian Air Force) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट (WDMMA) की ताजा ग्लोबल रैंकिंग में इंडियन एयर फोर्स (Indian Air Force) को दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर वायुसेना घोषित किया गया है। इस सूची में पहले स्थान पर अमेरिका और दूसरे स्थान पर रूस है, जबकि भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए तीसरा स्थान हासिल किया है।
कैसे तय होती है ताकत ?
वहीं इसमें दिलचस्प बात यह है कि चीन के पास भारत (Indian Air Force) की तुलना में अधिक सैन्य विमान हैं, लेकिन WDMMA की यह रैंकिंग केवल संख्या पर नहीं, बल्कि मारक क्षमता, तकनीकी आधुनिकीकरण, और संचालन दक्षता के आधार पर तय की गई है।
डब्ल्यूडीएमएमए हर साल विश्व की वायु सेनाओं की शक्ति का मूल्यांकन एक विशेष ‘ट्रूवैल रेटिंग’ (TVR) के आधार पर करती है। यह फॉर्मूला वायुसेना के आधुनिकीकरण, सैन्य सहयोग, आक्रमण और रक्षा क्षमता, मिशन की विविधता और प्रशिक्षण स्तर पर निर्भर करता है।
दरअसल किसी भी वायुसेना की रैंकिंग केवल उसके पास मौजूद विमानों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और इन्वेंट्री के मिश्रण से तय होती है। इसमें बमवर्षक विमान, विशेष मिशन विमान, प्रशिक्षण इकाइयाँ, और ‘ऑन-ऑर्डर’ (निर्माणाधीन या आने वाले) यूनिट्स को भी शामिल किया जाता है। साथ ही स्थानीय विमानन उद्योग की क्षमता और अनुभव को भी अहम माना जाता है।

अमेरिका का स्कोर सबसे ऊंचा
वहीं इस सूची में अमेरिकी वायुसेना (USAF) का ‘TVR स्कोर’ 242.9 है, जो इस सूची में सबसे ऊँचा है। अमेरिका के पास विमानों की विविधता के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन की भी जबरदस्त क्षमता है, जिससे उसकी वायुसेना दुनिया में शीर्ष पर बनी हुई है।
चीन और अन्य देशों की स्थिति
वहीं इस रैंकिंग में चीन चौथे नंबर पर खिसक गया है। जापान पांचवें स्थान पर है, जबकि इजरायल छठे, फ्रांस सातवें और ब्रिटेन आठवें नंबर पर हैं। वहीं, पाकिस्तान को इस सूची में 18वां स्थान मिला है, जबकि सऊदी अरब की वायुसेना 17वें स्थान पर है।
आपको बताते चलें कि WDMMA ने इस बार 103 देशों की वायु सेनाओं का मूल्यांकन किया है, जिनमें कुल 129 एयर सर्विसेज को शामिल किया गया। वहीं भारत की वायुसेना का यह प्रदर्शन न केवल देश की सैन्य क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारतीय रक्षा क्षेत्र लगातार ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

