वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की बड़ी तैयारी, होने जा रही है बड़ी Rafale डील

Sandesh Wahak Digital Desk: वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत करने में जुटा हुआ है। इसी क्रम में भारत और फ्रांस के बीच राफेल (Rafale) लड़ाकू विमानों को लेकर एक बेहद बड़ा रक्षा समझौता होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक यह मेगा डील अगले महीने फरवरी के मध्य तक फाइनल की जा सकती है, जिसमें राफेल के सबसे आधुनिक वर्जन F4 और F5 को शामिल किया जाएगा। यह अब तक की सबसे बड़ी राफेल डील मानी जा रही है।

फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे पर लग सकती है मुहर

सूत्रों के अनुसार फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के प्रस्तावित भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच इस अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति मैक्रों 16 से 20 फरवरी के बीच भारत आ सकते हैं और इसी दौरान इस Rafale डील का आधिकारिक ऐलान होने की पूरी संभावना है। इस समझौते के तहत भारत कुल 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदेगा, जो भारतीय वायुसेना की ताकत को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस Rafale डील की कुल लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस समझौते के तहत 18 राफेल विमान सीधे उड़ान योग्य स्थिति में भारत को मिलेंगे, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इन विमानों में करीब 60 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा, जिससे मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती मिलेगी और देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

नागपुर में बनेगी फाइनल असेंबली लाइन

सूत्रों के अनुसार राफेल (Rafale) विमानों की फाइनल असेंबली लाइन नागपुर में स्थापित की जाएगी। इस परियोजना से कई भारतीय कंपनियों को जोड़ा जाएगा, जिससे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई दिशा मिलेगी और भारत आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में और आगे बढ़ेगा।

यह मेगा डील दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में भारत को 90 नए राफेल F4 विमान मिलेंगे और भारतीय वायुसेना के मौजूदा 36 राफेल विमानों को भी F4 स्तर पर अपग्रेड किया जाएगा। दूसरे चरण में 24 राफेल F5 विमान खरीदे जाएंगे, जिनका निर्माण फ्रांस में ही किया जाएगा।

भारतीय वायुसेना को मिलेगी नई ताकत

भारतीय वायुसेना पहले से ही राफेल (Rafale) विमानों की क्षमताओं से संतुष्ट है। माना जा रहा है कि इस ऐतिहासिक समझौते के बाद भारत की वायु शक्ति और अधिक मजबूत होगी और देश की सामरिक सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

 

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