ईरान युद्ध की आड़ में भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का बड़ा खुलासा, AI के जरिए जहर घोलने की साजिश

Sandesh Wahak Digital Desk: ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध को एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन भारत की इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और सुरक्षा एजेंसियां एक अलग ही मोर्चे पर लड़ रही हैं। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, कट्टरपंथी तत्व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर भारतीय युवाओं के दिमाग में नफरत भरने की कोशिश कर रहे हैं।

अधिकारियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि अब कट्टरपंथ का प्रोपेगेंडा सिर्फ एक भाषा में नहीं, बल्कि सीधे युवाओं की मातृभाषा में परोसा जा रहा है। केरल के युवाओं को जोड़ने के लिए वीडियो मलयालम में तैयार किए जा रहे हैं। कश्मीर में घाटी के युवाओं को उकसाने के लिए उनकी अपनी कश्मीरी भाषा का सहारा लिया जा रहा है। यूपी और उत्तर भारत में हिंदी और उर्दू में एआई-जेनरेटेड वीडियो के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा है।

सिर्फ शिया नहीं, सुन्नी युवा भी निशाने पर

एजेंसियों का कहना है कि ये तत्व किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं। शिया और सुन्नी, दोनों ही समुदायों के युवाओं को उम्मा (मुस्लिम समुदाय) पर खतरे और नरसंहार जैसे भावनात्मक मुद्दों के जरिए भड़काने की कोशिश हो रही है। इनका अंतिम मकसद युवाओं को मानसिक रूप से तैयार कर भारत में ही लोन वुल्फ (अकेले हमला करना) जैसे हमलों के लिए उकसाना है।

हाल के दिनों में हैदराबाद, मुंबई, लखनऊ और दिल्ली में खामेनेई की मौत पर शोक जुलूस निकाले गए हैं। केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि कट्टरपंथी तत्व इन प्रार्थना सभाओं और रैलियों में घुसपैठ कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर धार्मिक चैनल चलाने वाले कुछ इन्फ्लुएंसर्स पर निगरानी बढ़ा दी गई है, जो अपनी बातों में बहुत सूक्ष्म (Subtle) तरीके से उकसावे वाली बातें शामिल कर रहे हैं।

ISI और आतंकी संगठनों की दोहरी चाल

भले ही इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अल-कायदा जैसे संगठन एक-दूसरे के विरोधी हों, लेकिन भारत के खिलाफ वे एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी इस आग में घी डालने का काम कर रही है। उसका मकसद किसी धर्म का समर्थन करना नहीं, बल्कि हजार घावों वाली अपनी पुरानी नीति के तहत भारत में अस्थिरता फैलाना है। एजेंसियां डार्क वेब पर होने वाले एन्क्रिप्टेड संदेशों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन (Money Trail) की भी कड़ी निगरानी कर रही हैं।

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