500 करोड़ की GST चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, UP STF ने 8 शातिरों को दबोचा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने टैक्स चोरी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए एक ऐसे अंतर्राज्यीय गिरोह को दबोचा है, जिसने बोगस (फर्जी) फर्मों के जरिए सरकार को ₹500 करोड़ से अधिक की राजस्व क्षति पहुंचाई है। एसटीएफ की मेरठ इकाई ने गिरोह के मास्टरमाइंड दिलशाद मलिक सहित 8 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।
बोगस फर्में और फर्जी ई-वे बिल
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का मुख्य सरगना दिलशाद मलिक मेरठ और गाजियाबाद में एकाउंटेंसी का काम करता था। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, तमिलनाडु, केरल, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में फर्जी दस्तावेजों पर बोगस फर्में पंजीकृत करा रखी थीं।
धोखाधड़ी का तरीका
फर्जी इनवॉइस: बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के फर्जी सेल्स इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का खेल: गिरोह वास्तविक फर्मों को फर्जी इनवॉइस बेचकर अवैध तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ दिलाता था।
सर्कुलर ट्रेडिंग: पैसों के लेन-देन को असली दिखाने के लिए बोगस फर्मों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की जाती थी और फिर उसे कैश के रूप में निकाल लिया जाता था।
आगरा और लखनऊ की फर्मों से करोड़ों की चपत
अकेले आगरा की ‘शर्मा इंटरप्राइजेज’ नामक फर्म के जरिए गिरोह ने ₹137 करोड़ की चोरी की। लखनऊ में भी हर्ष ट्रेडर्स और मार्शल इम्पैक्स जैसी 6 बोगस फर्में बनाकर करोड़ों का चूना लगाया गया। अभियुक्तों के मोबाइल से 50 से अधिक ईमेल आईडी मिली हैं, जिनका उपयोग ओटीपी और रिटर्न फाइलिंग के लिए किया जाता था।
बरामदगी का विवरण
एसटीएफ ने अभियुक्तों के पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामान बरामद किया है:
दस्तावेज: 90 फर्जी मोहरें, 54 चेकबुक, 54 डेबिट/क्रेडिट कार्ड और 25 बिलिंग फाइलें।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: 18 मोबाइल फोन और 03 लैपटॉप।
वाहन: 04 लग्जरी गाड़ियां (एंडेवर, किया सेल्टोस, मैग्नाइट और क्रेटा)।
गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ आगरा के थाना लोहामंडी में दर्ज मुकदमे के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
घोटाले का पैमाना
यह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। जांच में सामने आया कि गिरोह ने 500 करोड़ रुपये से अधिक की GST चोरी की है। इस गिरोह के तार तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और बिहार जैसे एक दर्जन से अधिक राज्यों से जुड़े थे। अकेले आगरा की एक फर्जी फर्म ‘शर्मा इंटरप्राइजेज’ ने ₹137 करोड़ का चूना लगाया।
गिरोह का ‘मोडस ऑपरेंडी’ (काम करने का तरीका)
यह गिरोह तकनीक और कानून की कमियों का फायदा उठाकर तीन चरणों में अपराध करता था। गिरोह ने फर्जी आईडी, आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर सैकड़ों ‘कागजी’ कंपनियां बनाईं। इनका भौतिक अस्तित्व (Physical presence) कहीं नहीं था। यह गिरोह इन फर्जी फर्मों के बीच आपस में ही माल की फर्जी खरीद-बिक्री दिखाता था। यह सब केवल कागजों और GST पोर्टल पर होता था, वास्तव में किसी माल की आवाजाही नहीं होती थी। इस फर्जी खरीद-बिक्री के आधार पर जो टैक्स क्रेडिट (ITC) जमा होता था, उसे ये गिरोह असली कंपनियों (Actual Firms) को बेच देते थे। असली कंपनियां इस फर्जी क्रेडिट का उपयोग अपना वास्तविक टैक्स बचाने के लिए करती थीं।
गिरोह का मास्टरमाइंड और नेटवर्क
गिरोह का मुख्य सरगना दिलशाद मलिक है, जो मेरठ और गाजियाबाद में एकाउंटेंसी का काम करता था। उसने अपने ऑफिस में लड़कों की एक पूरी टीम (सुहैल, वसीम, अंकुर, स्वतंत्र आदि) तैनात कर रखी थी। उनके पास 50 से अधिक ईमेल आईडी और सैकड़ों मोबाइल सिम कार्ड थे। ये लोग व्हाट्सएप के जरिए असली फर्मों से डेटा लेते थे और चंद मिनटों में फर्जी ई-वे बिल और इनवॉइस जनरेट कर देते थे।
STF की बड़ी बरामदगी
गिरोह की लग्जरी जीवनशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास से एंडेवर (Endeavour) और किया सेल्टोस (Kia Seltos) जैसी महंगी गाड़ियां बरामद हुई हैं।
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