पड़ताल: नगर पालिका आज़मगढ़ की बदहाल हालात से त्रस्त जनता, बोली – स्मार्ट सिटी नहीं, नरक सिटी बना दिया

Azamgarh News: पूर्वांचल की पहचान कहे जाने वाला आज़मगढ़ शहर आज बदहाली की मार झेल रहा है। नगर पालिका क्षेत्र की हालत ऐसी हो चुकी है कि लोग नाक पर रुमाल रखकर घरों से निकलने को मजबूर हैं। जगह-जगह बजती नालियां, टूटी सड़कें और गंदगी के ढेर आज शहर की असल पहचान बन गए हैं। जयरामपुर इलाके में जब संदेश वाहक की टीम पड़ताल के लिए पहुंची तो लोगों का गुस्सा साफ झलक रहा था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सफाईकर्मी महीनों तक दिखाई ही नहीं देते। मजबूरी में लोग अपनी जेब से पैसे देकर सफाई करवाते हैं। नालियां टूटी पड़ी हैं, डस्टबिन गायब हैं और छिड़काव जैसी बुनियादी व्यवस्था कभी की ही नहीं जाती।

धंसती सड़कें और धन के बंदरबांट का आरोप

शहर की सड़कों की हालत भी किसी से छिपी नहीं है। कुछ ही महीने पहले बनी सड़कें धंसकर गड्ढों में तब्दील हो गईं। लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों में सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति की जाती है, हकीकत में भ्रष्टाचार और धन का बंदरबांट होता है। जब इस मुद्दे पर नगर पालिका EO और चेयरमैन से सवाल पूछा गया तो उन्होंने किसी भी तरह का जवाब देने से इंकार कर दिया। शहरवासी कहते हैं कि पालिका की लापरवाही इतनी है कि अब वे इसे “नरक पालिका” कहने लगे हैं।

सपा का गढ़, लेकिन विकास में फिसड्डी

ध्यान देने वाली बात यह है कि आज़मगढ़ समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। मौजूदा समय में नगर पालिका अध्यक्ष सरफराज भी सपा से जुड़े हैं। बावजूद इसके शहर की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। न सड़कें सही, न सफाई, न ही रोशनी की व्यवस्था—जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

जनता का सवाल – “क्या यही है स्मार्ट सिटी का सपना?”

लोगों का कहना है कि सरकार और पालिका सिर्फ बड़े-बड़े सपने दिखाती है, जबकि हकीकत में आज़मगढ़ की तस्वीर बेहद भयावह है। जनता का सवाल है – “क्या यही स्मार्ट सिटी का सपना है, या फिर आज़मगढ़ को गंदगी और अंधेरे में धकेलने की साजिश?”

रिपोर्टः राम अवतार उपाध्याय 

 

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