इस्लाम भाईचारे, शांति और सौहार्द का प्रतीक: मौलाना अब्दुल गफ्फार सल्फी
सिद्धार्थनगर। थाना उस्का क्षेत्र के सोहास बाजार स्थित मरकज दावत तुस्सलफिया के प्रांगण में दस्तारबंदी एवं सालाना अंजुमन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, बनारस स्थित जामिया सालफिया रिवड़ी तालाब के वरिष्ठ प्रोफेसर और युवा मुस्लिम विद्वान मौलाना अब्दुल गफ्फार सल्फी ने कहा कि इस्लाम धर्म आपसी प्रेम, भाईचारे, सौहार्द और शांति का संदेश देता है। पवित्र कुरान-ए-पाक को उन्होंने जीवन जीने का पूर्ण संविधान बताते हुए कहा कि हमें इसके बताए हुए मार्ग पर चलना चाहिए।
मौलाना सल्फी ने कहा, “कुरान एक पूर्ण हिदायत है, जिसकी हिफाजत खुद अल्लाह ने अपने जिम्मे ली है। कुरान के साथ संबंध मजबूत करके ही बेहतर इंसान बना जा सकता है।” उन्होंने हाफिज-ए-कुरान छात्रों को अपने ज्ञान के अनुरूप आचरण करने का संकल्प लेने की सलाह दी।

शिक्षा के बिना नैतिकता अधूरी: मौलाना मोहम्मद असलम खान मदनी
कर्नाटक से आए वरिष्ठ मुस्लिम विद्वान मौलाना मोहम्मद असलम खान मदनी ने कहा कि आज मुस्लिम समाज में उत्पन्न अस्थिरता का मुख्य कारण इस्लाम से दूरी है। उन्होंने कहा, “शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्ति नहीं बल्कि नैतिक मूल्यों का पालन और बेहतर इंसान बनना है।” उन्होंने समाज में नैतिकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अल्लाह की इबादत और दीन की शिक्षा से ही समाज को सुधार सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मौलाना असलम खान ने कुल्लिया जुबैरिया गर्ल्स एजुकेशन एकेडमी का निरीक्षण किया और बच्चों को दीन की शिक्षा के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि सच्चे मुसलमान को केवल अल्लाह से डरना चाहिए और बड़ों का सम्मान करना चाहिए।

दस्तारबंदी के दौरान सम्मानित हुए हाफिज-ए-कुरान
कार्यक्रम में मोहम्मद सूफियान, मोहम्मद निहाल, वसीम अख्तर, और अब्दुल्लाह को कुरान पाक की शिक्षा पूर्ण करने पर दस्तारबंदी कर सम्मानित किया गया। हाफिजों को कुरान के बताए कानूनों पर चलने और इस्लाम के संदेश का प्रचार-प्रसार करने का संकल्प दिलाया गया।
नेपाल से आए विद्वानों का मार्गदर्शन
नेपाल के कृष्णानगर, झंडानगर स्थित जामिया सिराजुल उलूम के प्रोफेसर मौलाना परवेज याकूब मदनी, मौलाना वलीउल्लाह सल्फी और मौलाना खुर्शीद सल्फी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के सामने आने वाली चुनौतियों का मुख्य कारण दीनी शिक्षा से दूरी है।
मौलाना परवेज याकूब मदनी ने कहा, “आज मोबाइल और तकनीकी व्यस्तता ने लोगों को कुरान से दूर कर दिया है, जबकि कुरान पूरी मानवता के लिए अल्लाह का भेजा हुआ संदेश है। इसे नजरअंदाज करने का मतलब है खुद को अल्लाह के मार्गदर्शन से दूर करना।”
कार्यक्रम का संचालन और आयोजन
कार्यक्रम का संचालन मौलाना शमीम फैजी ने किया और सदारत मौलाना खुर्शीद अहमद सल्फी ने की। आयोजक समिति के मौलाना अब्दुर्रहमान, मौलाना मोहम्मद फैसल अब्दुल वहाब, और गुड्डू हाशमी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर मौलाना नसीम मदनी, मौलाना अब्दुल आखिर मक्की, मौलाना अतिकूर्रहमान, हाफिज उस्मान सल्फी, हाफिज निजामुद्दीन, मास्टर राजीव कुमार, और मास्टर सईदुर्रहमान सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

