AI का खौफ, IT शेयरों में हाहाकार! फरवरी में निवेशकों के 1 लाख करोड़ राख

Sandesh Wahak Digital Desk : फरवरी का महीना भारतीय आईटी सेक्टर के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दबदबे और ऑटोमेशन की आशंकाओं ने टेक कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली का दौर चलाया, जिससे निवेशकों की हजारों करोड़ की गाढ़ी कमाई पानी की तरह बह गई। हालांकि, 25 फरवरी को बाजार में हल्की राहत देखने को मिली, लेकिन पूरे महीने का नुकसान इतना भारी रहा कि उसे भुला पाना मुश्किल है।

निफ्टी IT को 23 साल में सबसे बुरा महीना

बात करें निफ्टी IT इंडेक्स की तो उसने फरवरी में करीब 21 फीसदी की गिरावट दर्ज की है। यह पिछले लगभग 23 सालों में किसी एक महीने का सबसे खराब प्रदर्शन है। आईटी कंपनियों का बाजार में 10 फीसदी से ज्यादा वजन होने की वजह से इस गिरावट ने पूरे शेयर बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। बुरा हाल यह रहा कि सभी 10 प्रमुख आईटी शेयरों में 17 से 27 फीसदी तक की गिरावट आई। सबसे ज्यादा मार कोफोर्ज पर पड़ी, जो करीब 27 फीसदी लुढ़क गया। वहीं, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और इंफोसिस (Infosys) जैसे दिग्गज शेयर भी तेज गिरावट से नहीं बच पाए।

LIC Shares

LIC और म्यूचुअल फंड्स की जेब पर भारी पड़ा नुकसान

इस गिरावट का सबसे बड़ा झटका बड़े संस्थागत निवेशकों को लगा है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, म्यूचुअल फंड्स को लगभग 64,000 करोड़ रुपये का चूना लगा है, वहीं देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC को भी करीब 37,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कुल मिलाकर देखें तो सिर्फ आईटी शेयरों में आई गिरावट ने निवेशकों की 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति साफ कर दी।

इस मामले में सबसे बड़ा ‘वेल्थ डिस्ट्रॉयर’ बना इंफोसिस। अकेले इस शेयर ने म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो से करीब 26,000 करोड़ रुपये का सफाया कर दिया। TCS की गिरावट से भी 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। इसके अलावा विप्रो (Wipro), एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Tech) और टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) ने भी निवेशकों की जमापूंजी पर भारी डाका डाला।

आखिर क्यों टूट रहे हैं IT के शेयर?

सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारतीय आईटी सेक्टर (करीब 300 अरब डॉलर का) अचानक निवेशकों की नज़रों से क्यों गिर गया? इसकी सबसे बड़ी वजह है AI को लेकर बढ़ती चिंता। डर यह है कि आने वाले समय में AI प्रोजेक्ट्स की रफ्तार तेज कर देगा, जिससे नए सौदों पर असर पड़ सकता है और सबसे बढ़कर, भारतीय कंपनियों के श्रम-आधारित (Labor-intensive) कारोबारी मॉडल को सीधी चोट लग सकती है।

अमेरिका की कंपनियों के नए-नए AI टूल्स ने ऑटोमेशन की रफ्तार को और तेज कर दिया है। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोप में सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की ओर से ब्याज दरों में कटौती में हो रही देरी और कंपनियों द्वारा आईटी बजट में की जा रही कटौती ने भी माहौल खराब किया है। कुस ब्रोकरेज फर्मों का तो यहां तक कहना है कि अगर AI सॉफ्टवेयर सर्विसेज की कमाई को प्रभावित करता है, तो अगले 3-4 सालों में आईटी कंपनियों की आमदनी (Revenue Growth) पर सालाना 2 फीसदी तक का असर पड़ सकता है।

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