जम्मू-कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त, लश्कर और हिजबुल से था गहरा नाता
Sandesh Wahak Digital Desk: जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सरकारी तंत्र में रहकर देश के खिलाफ साजिश रचने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर 5 ऐसे कर्मचारियों को बर्खास्त किया है, जो परदे के पीछे रहकर लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के लिए काम कर रहे थे।
1. मोहम्मद इश्तियाक (शिक्षक): इश्तियाक को 2013 में स्थायी शिक्षक बनाया गया था। जांच में पता चला कि वह सीधे पाकिस्तान में बैठे लश्कर कमांडर ‘अबू खुबैब’ के संपर्क में था। अप्रैल 2022 में पुलिस ने उसे एक आतंकी हमले की साजिश रचते समय रंगे हाथों पकड़ा था।
2. तारिक अहमद शाह (लैब तकनीशियन): बिजबेहरा के अस्पताल में तैनात तारिक ने अपने पद का इस्तेमाल आतंकियों की मदद के लिए किया। उसने अपने चाचा और एक वांछित आतंकवादी अमीन बाबा को सुरक्षित तरीके से पाकिस्तान भागने में मदद की। उसने न केवल उसे पनाह दी, बल्कि उसे अटारी-वाघा बॉर्डर तक पहुँचाने की व्यवस्था भी की।
3. बशीर अहमद मीर (सहायक लाइनमैन): बशीर पीएचई विभाग में काम करता था, लेकिन असल में वह बांदीपोरा में लश्कर का एक सक्रिय ‘ग्राउंड वर्कर’ था। वह आतंकियों को सुरक्षा बलों की लोकेशन बताता था। 2021 में उसके घर पर हुई मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए थे, जिसके बाद उसकी पोल खुली।
4. फारूक अहमद भट (वन विभाग फील्ड वर्कर): फारूक हिजबुल मुजाहिदीन का कट्टर समर्थक निकला। उसने अपने सरकारी आईडी कार्ड का गलत फायदा उठाकर चेकपोस्टों पर सुरक्षा बलों को चकमा दिया और आतंकियों को सीमा पार कराने में मदद की।
5. मोहम्मद यूसुफ (स्वास्थ्य विभाग ड्राइवर): श्रीनगर में तैनात यूसुफ एम्बुलेंस या सरकारी वाहन का इस्तेमाल हथियार और पैसा ढोने के लिए करता था। जुलाई 2024 में उसकी गाड़ी से पिस्तौल, ग्रेनेड और 5 लाख रुपए नकद बरामद हुए थे। वह जेल में बंद आतंकियों को फोन पहुँचाने वाले नेटवर्क का भी हिस्सा था।
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