Lucknow News: ‘जश्न-ए-आजादी’ कार्यक्रम में गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे को मिला नया आयाम
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत के आजादी के 78 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर, (लखनऊ) लेडी फातिमा चिल्ड्रेन एकेडमी, बुनियाद बाग में “जश्न-ए-आजादी” कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस विशेष अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम की भावना और भाईचारे के संदेश को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब, हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सम्मान को उजागर करते हुए एकता और विविधता के जश्न को मनाया गया।
विद्यालय की प्राचार्या ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि एकेडमी का उद्देश्य ऐसे बच्चों का निर्माण करना है जो न केवल शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट हों, बल्कि एकता, सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के महत्वपूर्ण मूल्यों को भी अपनाएं।
उन्होंने आगे कहा, “स्वतंत्रता दिवस केवल स्वतंत्रता का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे सामूहिक कर्तव्यों की याद भी है—हमारे एक-दूसरे और अपने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी।”
इस साल के कार्यक्रम में विशेष रूप से उन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का अद्वितीय योगदान और बलिदान को प्रमुखता दी गई, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी जान की बाजी लगाई।
इस अवसर पर उल्लेख किया गया कि भारत की आजादी का इतिहास हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। हजारों मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों ने आंदोलन में भाग लिया और अपने प्राणों का बलिदान दिया।
मौलवी अहमदुल्लाह शाह फैजाबादी, जिन्होंने 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शाहजहांपुर में शहीद हुए, तथा अशफाक उल्ला खान, जो काकोरी कांड के नायक थे, का भी याद किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें ड्रॉइंग प्रतियोगिता प्रमुख थी। “मेरा भारत, मेरा गौरव” विषय पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में छात्रों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए देशभक्ति, सांप्रदायिक एकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेशों को सुंदर तरीके से चित्रित किया।
इसके अलावा, “6 एक पेड़ मां के नाम” के तहत वृक्षारोपण अभियान भी चलाया गया। इस अवसर पर सज्जाद एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष जमाल मिर्जा, विद्यालय की प्रधानाचार्य मिर्जा मोहम्मद अली सज्जाद, डॉ. उरूज फातिमा, मुर्गा मोहम्मद अली अब्बास और विद्यालय के समस्त कर्मचारी और शिक्षकगण उपस्थित रहे।
इस शानदार आयोजन ने न केवल आजादी के जश्न को मनाया, बल्कि लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और गंगा-जमुनी तहजीब को भी उजागर किया।

