Jhansi News: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में खेल, सात विवाहित जोड़ों ने दोबारा रचाई शादी

Jhansi News: झांसी जिले की सामूहिक विवाह योजना, जिसका उद्देश्य गरीब बेटियों की मदद करना था, इस बार बड़े स्कैंडल का कारण बन गई है। 3 नवंबर को कोचा भावर विवाह घर में आयोजित इस कार्यक्रम के लिए कुल 285 जोड़ों ने पंजीकरण कराया और बायोमेट्रिक उपस्थिति सहित निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया दिखा। लेकिन जाँच में ऐसा भयंकर खुलासा हुआ कि कार्यक्रम की विश्वसनीयता ही सवालों के घेरे में आ गई।

पहले से शादीशुदा थे जोड़े

वहीं जांचे जाने पर यह पता चला कि उन 285 में से सात जिन जोड़ों ने सामूहिक विवाह के लिए फेरी ली, वे असल में वे कई वर्ष पहले से शादीशुदा थे। तो वहीं कुछ के यहां बच्चे भी हैं। फिर भी सरकारी अनुदान की लालच में वे दोबारा शादी का नाटक कर के सब्सिडी का लाभ उठाने की कोशिश में शामिल हुए।

दरसल यह केवल फर्जीवाड़ा नहीं है, बल्कि इसने सरकारी सत्यापन व्यवस्था की पोल खोल दी है। समाज कल्याण विभाग, बीडीओ, पंचायत सचिव और पर्यवेक्षक, जो हर आवेदन की जांच और सत्यापन के लिए जिम्मेदार हैं, वे कैसे इन फर्जी जोड़ों की फाइलें पास कर गए, यह अब जांच का विषय बन गया है। वहीं कई सवाल ऐसे भी उठ रहे हैं कि, क्या कागजात पहले से ही गढ़े गए थे? क्या स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही रही या किसी तरह की मिलीभगत हुई?

शुरू हुई जांच

समाज कल्याण विभाग की अधिकारी ललिता यादव ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ जोड़े पहले से ही शादीशुदा थे और इस पर टीप्पणी कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने साफ कहा कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल यह मामला केवल सात जोड़ों तक सीमित नहीं। यदि सत्यापन प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक हुई है, तो यह बहुत बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी को भी जन्म दे सकती थी। खासकर तब जब सरकारी अनुदान सीधे लोगों के खातों में पहुंचे। ऐसे में जरूरी है कि जांच पारदर्शी तरीके से हो, दोषी कितने भी बड़े हों, उन पर कठोर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी योजनाओं के लिए सत्यापन तंत्र और कड़ा किया जाए।

 

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