KGMU दीक्षांत समारोह में बोले स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, अब मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाने की मजबूरी खत्म
Lucknow News: लखनऊ के ऐतिहासिक किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) का दीक्षांत समारोह शनिवार को उत्साह और गौरव के साथ संपन्न हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भावी डॉक्टरों का उत्साह बढ़ाया और देश की बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था का खाका पेश किया।
जेपी नड्डा ने केजीएमयू के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि यहाँ से पढ़कर निकले छात्र आज पूरी दुनिया में मानवता की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, केजीएमयू जैसे संस्थान में काम करना या यहाँ से शिक्षा पाना किसी सौभाग्य से कम नहीं है। उन्होंने नए डॉक्टरों को सीख दी कि मरीज आपके पास केवल बीमारी के इलाज के लिए नहीं, बल्कि जीवन की उम्मीद लेकर आता है। उसे स्वस्थ करना एक तपस्या है।

1 एम्स से 23 एम्स तक का सफर
देश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए क्रांतिकारी बदलावों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया, 20वीं शताब्दी तक देश में सिर्फ एक एम्स (AIIMS) था, लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में आज 23 एम्स काम कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी पहले के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा हो गई है। नड्डा ने कहा कि पहले छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भागना पड़ता था, लेकिन आज भारत के पास बेहतरीन इंस्टीट्यूट्स, वर्ल्ड क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के आंकड़ों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह योजना अब 62 करोड़ लोगों को कवर दे रही है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि 70 साल से अधिक उम्र के हर बुजुर्ग को अब सालाना 5 लाख रुपये का फ्री हेल्थ कवर दिया जा रहा है, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। भारत के कोविड प्रबंधन की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जब विकसित देश कागजी सर्टिफिकेट दे रहे थे, तब भारत ने डिजिटल सर्टिफिकेट जारी कर दुनिया के सामने मिसाल पेश की।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों की निगरानी
मंत्री ने बताया कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली इतनी मजबूत हो चुकी है कि एक समय में करीब 5 करोड़ गर्भवती माताओं और उनके शिशुओं की डिजिटल ट्रैकिंग की जाती है, ताकि प्रसव से पहले और बाद का टीकाकरण (Vaccination) समय पर सुनिश्चित हो सके। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी भी मौजूद रहे। उन्होंने डिग्री पाने वाले छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि एक डॉक्टर के जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। हर नया मरीज और हर नया मामला आपको कुछ नया सिखाता है।
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