चीनी वीजा मामले में कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई से अलग हुए Justice Girish Kathpalia

Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस गिरीश कथपालिया (Justice Girish Kathpalia) ने चीनी वीजा मामले में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया है। कार्ति चिदंबरम ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की थी। जस्टिस कथपालिया के अलग होने के बाद अब इस मामले की आगे की सुनवाई 28 जनवरी को हाईकोर्ट की दूसरी बेंच करेगी।

सुनवाई के दौरान क्या कहा गया

सुनवाई के दौरान कार्ति चिदंबरम की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में कई बड़ी गलतियां हैं। उनके अनुसार कार्ति चिदंबरम पर जिस अपराध का आरोप ही नहीं लगाया गया था या जो आरोप बनाया गया है, उसी के आधार पर आरोप तय कर दिए गए हैं। सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि उन्होंने आदेश में दस प्रमुख त्रुटियों की ओर ध्यान दिलाया है, जिन पर हाईकोर्ट को विचार करना चाहिए।

पहले भी जज कर चुके हैं खुद को अलग

दरअसल यह पहला मौका नहीं है जब इस मामले में किसी जज ने खुद को सुनवाई से अलग किया हो। इससे पहले जस्टिस अनूप जयराम भंभानी और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा भी इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें चीनी वीजा स्कैम मामले में उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे।

किस मामले से जुड़ा है पूरा विवाद

यह मामला साल 2011 का है, जब 263 चीनी नागरिकों को वीजा जारी किए जाने के आरोप सामने आए थे। उस समय कार्ति चिदंबरम के पिता पी चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे। सीबीआई ने इस मामले में शेड्यूल ऑफेंस के तहत केस दर्ज किया था, जिसमें मेसर्स तलवंडी साबो पावर लिमिटेड की ओर से 50 लाख रुपये की रिश्वत दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

थर्मल पावर प्लांट से जुड़ा मामला

दरअसल तलवंडी साबो पावर लिमिटेड वेदांता ग्रुप की एक सब्सिडियरी कंपनी है, जिसे पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने पंजाब के मानसा जिले में 1980 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इस पावर प्लांट को स्थापित करने की प्रक्रिया में मेसर्स टीएसपीएल एक चीनी कंपनी मेसर्स शैनडोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्प के साथ काम कर रही थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में चीनी नागरिकों को वीजा जारी किए जाने का मामला सामने आया, जिस पर अब कानूनी लड़ाई जारी है।

 

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