Kanpur News: “डिजिटल अरेस्ट” सिर्फ ठगी का झांसा, कानपुर पुलिस ने किया अलर्ट जारी

Kanpur News: कानपुर पुलिस ने शहरवासियों को एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। हाल ही में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भारतीय कानून में “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई व्यवस्था नहीं है। पुलिस का कहना है कि यह शब्द पूरी तरह से साइबर ठगों की गढ़ी हुई चाल है, जिसका इस्तेमाल वे लोगों को डराने और आर्थिक ठगी करने के लिए कर रहे हैं।

ओटीपी या सीधे पैसे की मांग करते हैं

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में कई मामलों की शिकायतें सामने आईं, जिनमें लोगों को अज्ञात नंबरों से फोन कॉल या वीडियो कॉल आए। कॉल करने वाले खुद को इंटरपोल, सीबीआई या किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करते हैं और यह दावा करते हैं कि कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति का नाम किसी बड़े अपराध में दर्ज है। इसके बाद उन्हें धमकाया जाता है कि उन पर तुरंत कार्रवाई होगी और उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है। इस मनगढ़ंत प्रक्रिया के नाम पर ठग पीड़ितों को मानसिक दबाव में लेकर उनसे बैंक डिटेल, ओटीपी या सीधे पैसे की मांग करते हैं।

फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की बात पूरी तरह से झूठ और भ्रम है

कानपुर पुलिस ने नागरिकों को जागरूक करते हुए कहा है कि भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) या सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी परिभाषा मौजूद नहीं है। किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी केवल लिखित नोटिस, अदालत द्वारा जारी वारंट या मौके पर पुलिस की प्रत्यक्ष मौजूदगी में ही की जा सकती है। फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की बात पूरी तरह से झूठ और भ्रम फैलाने की कोशिश है।

पुलिस ने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है

इस धोखाधड़ी से बचाने के लिए कानपुर पुलिस ने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। इसके तहत एक आधिकारिक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें लोगों से अपील की गई है कि ऐसे किसी कॉल या संदेश पर भरोसा न करें। खासतौर पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाता विवरण, पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ भी साझा न करें।

घटना की सूचना साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें 

पुलिस ने यह भी बताया कि अगर किसी नागरिक को इस तरह का कॉल मिले तो वह तुरंत कॉल काट दें और घटना की सूचना साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी थाने में दें। समय पर जानकारी देने से न केवल पीड़ित खुद को ठगी से बचा पाएंगे, बल्कि अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को भी मदद मिलेगी।

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