पंकज चौधरी की ‘एंट्री’ से पहले कानपुर में खलबली, भाजपा की अंतर्कलह ने बढ़ाई टेंशन
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के 16 जनवरी को होने वाले कानपुर आगमन ने स्थानीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ संगठन ‘मिशन-2027’ की तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ कानपुर नगर निगम में महापौर बनाम पार्षद का विवाद पार्टी के लिए गले की हड्डी बन गया है। प्रदेश अध्यक्ष के दौरे से पहले स्थानीय पदाधिकारियों के सामने इस अंतर्कलह को शांत करने की बड़ी चुनौती है।
विवाद की जड़: ‘बंटी मुक्त’ नगर निगम की मांग
कानपुर नगर निगम में भाजपा के ही 6 बागी पार्षदों (पवन गुप्ता, अंकित मौर्या, विकास जायसवाल, आलोक पांडेय, लक्ष्मी कोरी और हरिस्वरूप निक्की) ने मोर्चा खोल रखा है। पार्षदों का आरोप है कि महापौर प्रमिला पांडेय के स्थान पर उनके बेटे अमित पांडेय ‘बंटी’ नगर निगम चला रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि जो महापौर के बेटे के सामने झुकता है, केवल उसी के वार्ड में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। सदन से निष्कासित दो पार्षदों (पवन गुप्ता और अंकित मौर्या) की बहाली को लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बैठकों का दौर और सांसद की शरण
विवाद सुलझाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। 7 जनवरी को प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मैराथन बैठकें की थीं, लेकिन जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन पर अमल नहीं हुआ। शनिवार को बागी पार्षदों ने सांसद देवेंद्र सिंह भोले से उनके आवास पर मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। सांसद ने उन्हें संगठन स्तर पर बात करने का आश्वासन दिया है। महापौर प्रमिला पांडेय ने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा है।
16 जनवरी का ‘शक्ति प्रदर्शन’
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी कानपुर में 842 पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। स्थानीय नेतृत्व डरा हुआ है कि यदि प्रदेश अध्यक्ष के आने से पहले यह रार खत्म नहीं हुई, तो अनुशासनहीनता का यह मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकता है।

