Kaushambi News: देश की सुरक्षा से जुड़ी बड़ी साजिश का खुलासा, 9 आरोपी गिरफ्तार, 5 नाबालिग भी शामिल

Kaushambi News: देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। कौशांबी थाना पुलिस और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो भारत के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सुरक्षा ठिकानों की गोपनीय जानकारी विदेश में बैठे लोगों तक पहुंचा रहा था। इस मामले में कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं।

पूरे मामले की शुरुआत 14 मार्च 2026 को हुई, जब पुलिस को भोवापुर इलाके में कुछ युवकों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। शुरुआती जांच में सामने आया कि ये युवक रेलवे स्टेशन, सुरक्षा बलों के ठिकानों और अन्य अहम स्थानों के वीडियो बनाकर विदेश भेज रहे थे और पैसों के लालच में अन्य युवाओं को भी इस नेटवर्क से जोड़ रहे थे।

पुलिस की कार्रवाई और SIT का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना कौशांबी में मुकदमा दर्ज किया गया, जिसमें BNS की धारा 61(2)/152 और ऑफिशियल एक्ट की धारा 3/5 के तहत केस दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 पुरुष और 1 महिला को गिरफ्तार किया। उनके मोबाइल फोन की जांच में कई आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और संवेदनशील लोकेशन मिलीं, जो देश की सुरक्षा से सीधे जुड़ी थीं।

इसके बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश पर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया, जिसमें एसीपी इंदिरापुरम, अपराध शाखा, खुफिया विभाग, साइबर क्राइम टीम और स्वाट टीम को शामिल किया गया। 17 मार्च 2026 से SIT ने गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ शुरू की।

सीमा पार से संचालित हो रहा था गिरोह

पूछताछ के दौरान सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन सीमा पार से किया जा रहा था। गिरोह के मुख्य हैंडलर सुहैल मलिक, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर बताए गए हैं। इनके निर्देश पर भारत के अलग-अलग इलाकों में मौजूद आरोपी रेलवे स्टेशन, सुरक्षा ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी कर फोटो, वीडियो और GPS लोकेशन विदेश भेजते थे।

20 मार्च 2026 को SIT ने आगे की कार्रवाई करते हुए 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में गणेश, विवेक, गगन कुमार प्रजापति और दुर्गेश निषाद के नाम सामने आए हैं। इनका नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल तक फैला हुआ पाया गया है।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपने मोबाइल फोन में एक विशेष एप्लिकेशन का उपयोग करते थे, जिसके जरिए लोकेशन और डेटा शेयर किया जाता था। इस ऐप को चलाने की ट्रेनिंग उन्हें विदेश में बैठे हैंडलर्स द्वारा ऑनलाइन दी जाती थी।

CCTV कैमरों से लाइव फीड भेजने की साजिश

गिरोह की साजिश केवल वीडियो भेजने तक सीमित नहीं थी। आरोपियों ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और सोनीपत रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर सोलर सिस्टम से चलने वाले सिम-बेस्ड स्टैंडअलोन CCTV कैमरे लगाए थे। इन कैमरों की लाइव फीड विदेश भेजी जा रही थी। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर ऐसे कैमरे बरामद कर लिए हैं और जांच में यह भी सामने आया है कि करीब 50 अन्य स्थानों पर भी ऐसे कैमरे लगाने की योजना थी।

OTP और सिम कार्ड के जरिए चल रहा था नेटवर्क

गिरोह का एक और खतरनाक तरीका भी सामने आया है, जिसमें आरोपी भारतीय मोबाइल नंबरों पर आने वाले OTP विदेश भेजते थे, ताकि वहां बैठे लोग व्हाट्सएप और सोशल मीडिया अकाउंट संचालित कर सकें। इसके लिए आरोपी 500 से 5000 रुपये तक वसूलते थे।

सिम कार्ड हासिल करने के लिए ये लोग स्नैचिंग, एजेंट्स के जरिए प्री-एक्टिवेटेड सिम खरीदना और अपने या परिवार के नाम पर सिम लेना जैसे तरीके अपनाते थे। इसके बाद इन सिम कार्ड्स के OTP विदेश भेज दिए जाते थे। पैसों के लेन-देन के लिए UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन सीधे खाते में पैसे लेने के बजाय जन सेवा केंद्रों या दुकानों के जरिए नकद रकम हासिल की जाती थी।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और आगे की जांच जारी

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह खास तौर पर तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं को निशाना बनाता था, जैसे मोबाइल मैकेनिक, CCTV ऑपरेटर या कंप्यूटर से जुड़े लोग। साथ ही ऐसे युवाओं को भी जो आर्थिक रूप से कमजोर होते थे और पैसों की जरूरत में इस नेटवर्क का हिस्सा बन जाते थे।

फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर की तलाश में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और साजिश की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। यह मामला देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और आने वाले समय में इसमें और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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