इस्लामी क्रांति की वर्षगांठ पर खामेनेई का बड़ा बयान, कहा- ईरान के हथियारों की नकल कर रहा अमेरिका

Sandesh Wahak Digital Desk: ईरान (Iran) की इस्लामी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ के मौके पर आयतुल्लाह खामेनेई ने ऐसा भाषण दिया, जिससे ईरान (Iran) के लोगों में आत्मविश्वास, उम्मीद और महत्वाकांक्षा की भावना मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि कभी किसी ने सोचा भी नहीं था कि ईरान एक दिन ऐसे हथियार बनाएगा, जिसकी नकल अमेरिका करने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहले कल्पना जैसा लगता था, लेकिन अब यह सच बन चुका है।

बैन के बावजूद आगे बढ़ा Iran

अमेरिका कई सालों से ईरान (Iran) के ड्रोन और मिसाइल प्रोग्राम पर प्रतिबंध लगाता रहा है। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान को ऐसे हथियार बनाने या बेचने से रोकना रहा है। इसके बावजूद ईरान ने अपने ड्रोन तकनीक को आगे बढ़ाया और शाहेद-136 जैसे ड्रोन को तैयार किया, जिसे एकतरफा हमले के लिए सस्ता और प्रभावी माना जाता है। इस ड्रोन को अक्सर कामिकेज़ या सुसाइड ड्रोन भी कहा जाता है।

अमेरिका और रूस ने भी की ईरानी ड्रोन की नकल

खामेनेई का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर में एक बैठक के दौरान ईरानी ड्रोन की ताकत की प्रशंसा की थी। ट्रंप ने कहा था कि शाहेद-136 ड्रोन तेज, प्रभावी और घातक है, जिसकी लागत करीब 35 से 40 हजार डॉलर बताई जाती है। वहीं अमेरिकी कंपनी ने इसकी नकल करते हुए करीब 4.1 करोड़ डॉलर का ड्रोन प्रस्तावित किया है।

इसके अलावा रूस ने भी ग्रान-2 नाम से इस ड्रोन का अपना संस्करण बनाकर यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल किया है। चीन ने भी ‘लॉन्ग एम9’ नाम के ड्रोन का परीक्षण किया है, जो शाहेद-136 से मिलता-जुलता बताया जाता है।

वैज्ञानिक क्षेत्र में भी ईरान ने दिखाई प्रगति

अपने भाषण में आयतुल्लाह खामेनेई ने ईरान (Iran) के युवाओं की वैज्ञानिक सोच और क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नैनोटेक्नोलॉजी, चिकित्सा, परमाणु और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में ईरान दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है।

उन्होंने ‘ओमीद’, ‘नूर’, ‘ज़फर’ और ‘पयाम’ जैसे उन्नत उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण का जिक्र किया। साथ ही ‘सफीर’, ‘सीमुर्ग’ और ‘कासेद’ जैसे स्वदेशी सैटेलाइट के निर्माण को भी ईरान की वैज्ञानिक प्रगति का उदाहरण बताया।

प्रतिबंधों के बावजूद प्रगति का दावा

खामेनेई ने कहा कि यह प्रगति अमेरिका और यूरोप के प्रतिबंधों की विफलता को भी दिखाती है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के बावजूद ईरान (Iran) ने तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

 

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